राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ता से पूछा- इतनी जल्दबाजी क्या है?

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने राम मंदिर में हुए गबन की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की अपील की थी. याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और राज्य सरकार जिस तरह से मामले को संभाल रही है, उससे संदेह पैदा हो रहा है. इस पर न्यायमूर्ति सुंदरश ने पूछा, “इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्या है?” अदालत ने अंततः कहा कि अदालत दोबारा खुलने के बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा.
क्या है पूरा मामला ?
सपा के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने 7 जून को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी की थी. इसके बाद 8 जून सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की. 9 जून को भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर मामले की CBI और ED से जांच की मांग की. 9 जून को राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठक की. चढ़ावे की राशि, गिनती और लेखा-जोखा पर चर्चा की. 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से मामले पर रिपोर्ट मांगी ली. दूसरी तरफ, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोप खारिज किए. 11 जून को मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान सामने आया.
अब तक क्या हुआ ?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और उनके निर्देश पर गठित SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के चढ़ावा चोरी प्रकरण में FIR दर्ज की गई. ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया. FIR में 8 लोगों को नामजद किया गया, जिनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल थे.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा (Champat Rai Resigns) दे दिया है. साथ ही ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपना पद त्याग (Anil Mishra Resigns) दिया है. गबन के बाद से इन दोनों पदाधिकारियों पर ही सबसे ज्यादा दबाव बना हुआ था. दोनों पर इस्तीफे का दबाव था.