कबीरधाम : 5 माह से बंद पड़े बोड़ला शहद प्रसंस्करण केंद्र को “सफल मॉडल” बताकर अधिकारियों ने कराया निरीक्षण !


//बड़ा खुलासा — प्रशासनिक ढोंग की पोल खुली//
क्या अरुणाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को गुमराह कर सरकारी तंत्र ने रचा फर्जी उपलब्धियों का खेल ?
कवर्धा/बोड़ला।
कबीरधाम जिले का बोड़ला शहद प्रसंस्करण केंद्र अब गंभीर सवालों और प्रशासनिक संदेहों के घेरे में आ गया है। जिस केंद्र को बड़े-बड़े अधिकारी “सफल मॉडल” बताकर प्रचारित कर रहे हैं, वही केंद्र पिछले लगभग 5 महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। न उत्पादन हो रहा, न प्रसंस्करण, न पैकेजिंग और न ही किसी प्रकार की नियमित गतिविधि संचालित हो रही है।
इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को केंद्र का निरीक्षण कराकर उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटना सीधे-सीधे वास्तविक स्थिति छिपाने और शासन को गुमराह करने जैसा प्रतीत हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निरीक्षण के नाम पर केवल दिखावटी व्यवस्थाएं सजाकर बंद पड़े केंद्र को चालू बताने का प्रयास किया गया। यदि केंद्र वास्तव में संचालित था, तो पिछले 5 महीनों का उत्पादन रिकॉर्ड, बिक्री विवरण, खरीदी रजिस्टर, समूह भुगतान और कार्य दिवस सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
सबसे गंभीर बात यह है कि जिन महिला समूहों और ग्रामीणों को रोजगार देने का दावा किया जा रहा था, वे आज काम बंद होने से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। करोड़ों की योजनाएं कागजों में चल रही हैं और धरातल पर ताले लटक रहे हैं।
जनता पूछ रही है —
क्या उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को जानबूझकर झूठी और भ्रामक जानकारी दी गई?
क्या विभागीय अधिकारियों ने बंद केंद्र को चालू दिखाकर फर्जी सफलता का प्रदर्शन किया?
क्या शासन स्तर पर गलत रिपोर्ट भेजकर सरकारी धन और योजनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है?
आखिर 5 महीने से बंद केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सूत्रों के अनुसार, केंद्र के बंद होने की जानकारी विभागीय अधिकारियों को पहले से थी, इसके बावजूद निरीक्षण और प्रचार-प्रसार कर स्वयं की वाहवाही लूटने का प्रयास किया गया। इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जनता की मांग —
इस पूरे मामले की कलेक्टर स्तर से नहीं, बल्कि उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
केंद्र बंद होने के बावजूद उसे चालू दर्शाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों, प्रबंधन एवं संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध—
कड़ी विभागीय जांच
निलंबन की कार्यवाही
वित्तीय अनियमितता की जांच
शासन को गुमराह करने पर दंडात्मक कार्रवाई
तत्काल की जाए।
“कागजों में विकास और जमीन पर ताले” — यही है बोड़ला शहद केंद्र की असली तस्वीर !



