कवर्धा में भूमाफियाओं का आतंक!

नहर-नाले, चारागाह और शासकीय जमीनों पर अवैध प्लाटिंग का काला खेल, राजस्व अमला सवालों के घेरे में
कवर्धा (कबीरधाम)। जिले में शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा और प्लाटिंग का खेल अब विकराल रूप लेता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब नहर, नाले, चारागाह और जल निकाय की जमीनें भी भूमाफियाओं के कब्जे से सुरक्षित नहीं बची हैं। पूरे मामले को लेकर जिलाधीश को शिकायत सौंपते हुए राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
आरोप है कि कवर्धा शहर सहित कवर्धा विकास योजना (पुनर्विलोकन) 2031 में शामिल कई ग्रामों में भूमाफिया खुलेआम शासकीय भूमि पर कब्जा कर अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। इस पूरे खेल में राजस्व अमले की संदिग्ध भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नहर-नालों तक पर कब्जा, जल निकासी व्यवस्था खतरे में
जानकारी के मुताबिक, जिले में नहर, नाले, घास भूमि (चारागाह) और अन्य शासकीय भूमि को अवैध रूप से काटकर प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है। इससे शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। वहीं भविष्य में जल निकासी व्यवस्था, पर्यावरण और शहर के सुनियोजित विकास पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर शासकीय जमीन को निजी भूमि बताकर भोली-भाली जनता को बेचा जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का अभाव भूमाफियाओं के हौसले बुलंद कर रहा है।
कृषि भूमि पर भी धड़ल्ले से कट रहे प्लॉट
कवर्धा शहर और आसपास के क्षेत्रों में नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 292(ग) की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक किसी भी भूमि की प्लाटिंग से पहले टीएनसीपी (Town & Country Planning) की अनुमति, रेरा पंजीयन तथा कृषि भूमि का विधिवत डायवर्जन अनिवार्य है, लेकिन इन सभी नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 एवं ग्राम पंचायत कालोनाइजर नियम 2013 का उल्लंघन कर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फैल रहा है। इससे भविष्य में सड़क, पानी, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं का संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
शासकीय खसरों पर कब्जे का बड़ा खुलासा
शिकायत में कई शासकीय खसरों का उल्लेख किया गया है, जहां कथित रूप से अवैध कब्जा और प्लाटिंग की जा रही है।
- गुरूनाला सेतु क्षेत्र में खसरा क्रमांक 1049
- ग्राम तालपुर में खसरा क्रमांक 109 एवं 78
- ग्राम घोठिया में खसरा क्रमांक 137
- ग्राम छिरहा में शासकीय खसरा क्रमांक 2
बताया जा रहा है कि इनमें से कई भूमि नाले और जल निकाय की श्रेणी में दर्ज हैं, इसके बावजूद वहां प्लॉट काटे जा रहे हैं।
राजस्व विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में
कवर्धा शहर के चारों दिशाओं में राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। भूमाफिया खुलेआम शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे बेच रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे हुए हैं।
पटवारी, आरआई, तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ राजस्व कर्मियों की भूमाफियाओं से सांठगांठ के चलते यह पूरा खेल बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है।
कलेक्टर से कठोर कार्रवाई की मांग
शिकायत में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमाफियाओं पर एफआईआर दर्ज करने तथा संबंधित राजस्व अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है।
जिले में लगातार बढ़ रहे इस अवैध कब्जे और प्लाटिंग के कारोबार ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कार्रवाई करता है या फिर भूमाफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।



