कबीरधाम में अवैध प्लाटिंग का बड़ा खेल! भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने करोड़ों की सड़क परियोजना पर उठे सवाल

कवर्धा। कबीरधाम जिले में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं और कृषि भूमि को नियमों की अनदेखी कर अवैध कॉलोनियों में तब्दील किया जा रहा है। अब इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये की सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदेश युवा कांग्रेस सचिव आकाश केशरवानी ने कलेक्टर कबीरधाम के नाम शिकायत सौंपकर कवर्धा शहर के आसपास हो रही अवैध प्लाटिंग की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में क्या है आरोप?
शिकायत के अनुसार कैलाश नगर से जेवड़नकला मार्ग एवं सरस्वती शिशु मंदिर, भागुटोला के पीछे स्थित क्षेत्र में राजस्व निरीक्षक हल्का राजानवागांव अंतर्गत कृषि भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति बड़े पैमाने पर प्लॉट काटे जा रहे हैं।
आरोप है कि खसरा क्रमांक 63/6, 63/10, 63/13, 63/14, 63/11, 62/1, 62/5 एवं 61/3 की भूमि पर नियमों को दरकिनार कर अवैध प्लाटिंग की गई है। इतना ही नहीं, मुरूम और गिट्टी डालकर अवैध रूप से सड़क भी बनाई गई, जो भू-राजस्व संहिता एवं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों का खुला उल्लंघन बताया गया है।
6.50 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाओं पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, वहीं लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 6.50 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क निर्माण कार्यों की निविदा जारी कर दी है।
कवर्धा-लोहारा मुख्य मार्ग से सरस्वती शिशु मंदिर, सुधाविहार भागुटोला से जेवड़न तक लगभग 600 मीटर सड़क निर्माण की स्वीकृत लागत करीब 1.33 करोड़ रुपये है, जिसे लगभग 1.15 करोड़ रुपये में निष्पादित किया जाना प्रस्तावित है।
वहीं स्वपन पेट्रोल पंप, कैलाश नगर से जेवड़न तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण कार्य के लिए 5 करोड़ 32 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
टेंडर से पहले ही शुरू हुआ काम?
आरोप है कि सड़क निर्माण की ऑनलाइन निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 22 जून 2026 निर्धारित थी, लेकिन इससे पहले ही मौके पर मुरूम डालने और प्रारंभिक निर्माण गतिविधियां शुरू कर दी गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे अवैध प्लाटिंग करने वालों को सीधा लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
नियम क्या कहते हैं?
छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत (कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 1999 के अनुसार कोई भी व्यक्ति, संस्था या फर्म कृषि भूमि को भूखंडों में विभाजित कर कॉलोनी विकसित करने से पहले विधिवत पंजीयन एवं आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के लिए बाध्य है।
नियमों के तहत कालोनाइजर को सड़क, नाली, पुलिया, पेयजल, विद्युत, वृक्षारोपण, ओपन स्पेस तथा कमजोर वर्गों के लिए भूखंड जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन कर अवैध कॉलोनी विकसित करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। शिकायत में दावा किया गया है कि ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर 3 से 7 वर्ष तक के कारावास सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध प्लाटिंग, सड़क निर्माण प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों और भूमाफियाओं की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही करोड़ों रुपये की सड़क परियोजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं।



