संविदा भर्ती के खिलाफ वन कर्मचारियों का बिगुल, कबीरधाम में एकजुट होकर किया जोरदार विरोध प्रदर्शन

कवर्धा। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ रायपुर के प्रांतीय आह्वान पर कबीरधाम जिले के समस्त वन कर्मचारियों ने एक स्वर में संविदा भर्ती और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। कर्मचारियों ने बैठक आयोजित कर शासन के प्रस्ताव को युवा कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं और विभागीय पदोन्नति व्यवस्था के लिए घातक बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।
बैठक के बाद संघ का प्रतिनिधिमंडल वन मंडल कार्यालय पहुंचा और वनमंडलाधिकारी कवर्धा के नाम ज्ञापन सौंपकर शासन तक अपनी मांगें पहुंचाने का आग्रह किया। ज्ञापन संलग्नाधिकारी अभिनव केशवानी को सौंपा गया।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि वन विभाग की कार्यप्रणाली अन्य विभागों से पूरी तरह भिन्न है। वनरक्षक, वनपाल, उप क्षेत्रपाल और वन क्षेत्रपाल जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को दुर्गम जंगलों में गश्त, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, अवैध कटाई और तस्करी की रोकथाम, वन अपराधों की जांच, अग्नि नियंत्रण तथा अतिक्रमण हटाने जैसे जोखिमपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। ऐसे कार्यों के लिए उच्च शारीरिक क्षमता, त्वरित निर्णय क्षमता और लगातार फील्ड में सक्रिय उपस्थिति आवश्यक होती है।
संघ ने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति से विभाग की कार्यकुशलता प्रभावित होगी और वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा। इससे कर्मचारियों में असंतोष और निराशा बढ़ेगी तथा सेवा संरचना कमजोर होगी।
वन कर्मचारियों ने यह भी कहा कि विभाग में वनरक्षक के हजारों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं और भर्ती प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। नवसृजित पदों पर भी नियमित भर्ती और पदोन्नति की आवश्यकता है। ऐसे समय में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः नियुक्त करना बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय होगा।
संघ ने वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टि से भी इस प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताया। पदाधिकारियों का कहना है कि संविदा अथवा दैनिक वेतन पर नियुक्त कर्मचारियों को पूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार नहीं दिए जा सकते, जिससे जवाबदेही और कार्य संचालन में जटिलताएं उत्पन्न होंगी।
वन कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए।
विभाग में लंबित पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए।
लंबित वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नियुक्तियां दी जाएं।
नवसृजित एवं रिक्त पदों पर नियमित भर्ती और पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
कर्मचारियों के कैरियर उन्नयन और प्रशासनिक दक्षता के लिए दीर्घकालीन मानव संसाधन नीति लागू की जाए।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष परसराम चंद्राकर, संभागीय सचिव निर्मला बंजारे, कार्यकारी जिला अध्यक्ष ज्ञानेश्वर आनंद, संगठन सचिव सनत मिश्रा, भोलाराम साहू, जिला सचिव सचिन सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष तारकेश यादव, कोषाध्यक्ष विनोद भास्कर तथा संघ प्रवक्ता कौशल साहू सहित बड़ी संख्या में वन कर्मचारी उपस्थित रहे।



