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“पिपरिया में विकास के नाम पर करोड़ों का खेल? सीएमओ और इंजीनियर की कार्यशैली पर सवाल”

पिपरिया नगर पंचायत में विकास या दिखावे का खेल? करोड़ों की चौक राजनीति पर उठे सवाल


नगरवासियों की मूलभूत समस्याएं जस की तस, चौक और मूर्तियों पर बह रहा करोड़ों का धन


कवर्धा/पिपरिया। कबीरधाम जिले की नगर पंचायत पिपरिया इन दिनों विकास कार्यों से अधिक कथित फिजूलखर्ची और प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा में है। नगर में एक ही क्षेत्र के आसपास करोड़ों रुपये की लागत से घड़ी चौक, दानवीर भामा शाह चौक, दीनदयाल उपाध्याय चौक और बस स्टैंड चौक का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे लेकर आम नागरिकों के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगरवासियों का कहना है कि जहां एक ओर नगर की कई बस्तियां पेयजल, सड़क, नाली, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर चौक निर्माण, चित्रकारी और पुतला स्थापना जैसे कार्यों पर भारी भरकम राशि खर्च की जा रही है। लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतनी बड़ी राशि से एक ही क्षेत्र में चार-चार चौकों का निर्माण किस आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन विकास के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर केवल दिखावटी परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है। नगर के कई वार्डों में जर्जर सड़कें, अधूरी नालियां, जल निकासी की समस्या और सफाई व्यवस्था की बदहाली आज भी बनी हुई है, लेकिन इन समस्याओं के समाधान के बजाय सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
सीएमओ और इंजीनियर की कार्यशैली पर सवाल
नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और संबंधित इंजीनियर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि बिना समुचित योजना और जनआवश्यकताओं का आकलन किए निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि नगर में जहां जरूरत है वहां विकास नहीं पहुंच रहा, जबकि जहां आवश्यकता नहीं है वहां निर्माण कार्यों की भरमार है।
जनता पूछ रही – क्या यही है विकास?
नगरवासियों का सवाल है कि यदि करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध थी तो उसे पेयजल व्यवस्था सुधारने, खराब सड़कों के नवीनीकरण, नालियों के निर्माण, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और अन्य जनसुविधाओं पर खर्च किया जाना चाहिए था। चौक और मूर्तियां नगर की पहचान हो सकती हैं, लेकिन जब जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हो तो ऐसी परियोजनाएं लोगों को विकास से अधिक दिखावे का माध्यम प्रतीत होती हैं।
जांच और जवाबदेही की मांग
नगर के जागरूक नागरिकों ने चौक निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्यों पर हुए खर्च, स्वीकृत राशि, तकनीकी स्वीकृति तथा कार्यों की उपयोगिता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जनधन का उपयोग जनहित के बजाय केवल दिखावे और प्रचार के लिए किया जा रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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