30 लाख के DMF काम पर ‘सब सही’ की मुहर, जमीन पर सच्चाई संदिग्ध — जिला अस्पताल कवर्धा में जांच पर उठे बड़े सवाल

कवर्धा
जिला अस्पताल कवर्धा में DMF (जिला खनिज न्यास) फंड से कराए गए करीब 30 लाख रुपये के बाथरूम और शौचालय मरम्मत कार्य को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कागजों में सब कुछ दुरुस्त बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
RTI से खुला मामला, खर्च पर संदेह
सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में लोक निर्माण विभाग द्वारा अस्पताल परिसर में मरम्मत कार्य कराया गया।
रिकॉर्ड में टाइल्स, नल, एल्युमिनियम दरवाजे, कमोड-बेसिन जैसी सामग्री लगने का दावा किया गया है।
लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि लगभग 30 यूनिट में काम हुआ, तो प्रति यूनिट 1 लाख रुपये खर्च दिखाना वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
जांच हुई, लेकिन सवाल और गहरे
शिकायत के बाद जांच समिति गठित की गई और 24 मार्च 2026 को निरीक्षण भी किया गया।
लेकिन जांच की प्रक्रिया ही अब विवादों में है।
“निरीक्षण या औपचारिकता?”
शिकायतकर्ता के आरोप बेहद गंभीर हैं:
न तो कोई तकनीकी माप-जोख हुई
न ही कार्य का विस्तृत भौतिक सत्यापन
सिर्फ घूमकर देख लिया गया
इसके बावजूद रिपोर्ट में साफ लिखा गया — “कार्य सही पाया गया”
कागजों में क्लीन चिट!
आरोप है कि जांच अधिकारियों ने केवल स्टीमेट और MB (मेजरमेंट बुक) का मिलान कर रिपोर्ट तैयार कर दी।
यानी जमीनी जांच के बजाय कागजों के आधार पर ही क्लीन चिट दे दी गई।
मिलीभगत के आरोप तेज
अब सवाल उठ रहा है कि क्या एक विभाग दूसरे विभाग को बचाने में जुटा है?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि मामला “चोर-चोर मौसेरे भाई” जैसा नजर आ रहा है।
अधिकारी का बयान बना चर्चा का विषय
जब इस मामले में संबंधित अधिकारी से सवाल किया गया, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला रहा:
“ऐसी शिकायत करो जिसमें पुराना काम नया दिखाया गया हो, तब कुछ होगा।”
इस बयान ने जांच की निष्पक्षता पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़े सवाल
क्या 30 लाख रुपये का काम वास्तव में हुआ?
बिना तकनीकी जांच के क्लीन चिट कैसे?
क्या जांच सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई?
अब क्या?
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र थर्ड पार्टी जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।



