कबीरधाम में स्वच्छता का ‘महाघोटाला’: कागजों पर नंबर-1, जमीन पर नरक! पहली बारिश ने फोड़ा पालिका की ढोंग का घड़ा!

कबीरधाम।
स्वच्छता के नाम पर नंबर वन का ढिंढोरा पीटने वाली कबीरधाम नगर पालिका परिषद् के दावों की धज्जियां उड़ चुकी हैं! जिस तमगे को दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों-करोड़ों रुपये विज्ञापनों और कागजी कार्यवाहियों में फूंक दिए गए, उसकी असलियत पहली हल्की बारिश ने ही चौराहे पर लाकर खड़ी कर दी है। यह स्वच्छता का सम्मान नहीं, बल्कि कबीरधाम की जनता को ‘शर्मसार’ करने वाला प्रशासनिक खेल है!
सड़कों पर बहता नरक, बजबजाती नालियां!
नगर पालिका परिषद की घोर लापरवाही का आलम देखिए—महज हल्की सी फुहार क्या पड़ी, पूरे शहर का ड्रेनेज सिस्टम घुटने टेक गया। नगर के अधिकांश वार्डों की नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं। नालियों का बदबूदार, काला और बजबजाता पानी अब नालियों में नहीं, बल्कि सीधे मुख्य सड़कों पर मुख्यधारा में बह रहा है। इस नरकीय गंदगी और जानलेवा सड़ांध के बीच से गुजरने को मजबूर जनता पूछ रही है—क्या इसी ‘नरक’ को नंबर वन कहते हैं?
जनता का पैसा स्वाहा, अफसरशाही मस्त!
यह साफ तौर पर प्री-मानसून सफाई के नाम पर सरकारी खजाने की खुली लूट का मामला है। कागजों में नालियों की सफाई के नाम पर लाखों रुपये ठिकाने लगा दिए गए, लेकिन जमीन पर ढाक के वही तीन पात हैं। नगर पालिका के हुक्मरानों ने सिर्फ एयर-कंडीशनर कमरों में बैठकर स्वच्छता के आंकड़े तैयार किए हैं। अगर धरातल पर रत्ती भर भी काम हुआ होता, तो आज शहर की यह दुर्दशा नहीं होती।
बीमारियों को खुला न्यौता, सो रहा प्रशासन!
इस भीषण गंदगी से अब शहर में संक्रामक बीमारियों और महामारी का खतरा मंडराने लगा है। जनता बदबू और मच्छरों के आतंक से त्रस्त है, लेकिन नगर पालिका परिषद गहरी नींद में सोया हुआ है। यह बदइंतजामी सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
क्या कबीरधाम की जनता सिर्फ टैक्स भरने और इस प्रशासनिक नाकामी को झेलने के लिए है? इस ताबड़तोड़ लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज कब गिरेगी?



