कबीरधाम जिलाकबीरधाम विशेष

“संघर्ष से समृद्धि तक—कबीरधाम में विकास का इंजन बना भोरमदेव शक्कर कारखाना”

“किसानों की किस्मत बदली, गांवों में आई रौनक—भोरमदेव कारखाने का असर


कवर्धा।
कबीरधाम जिला कभी औद्योगिक रूप से काफी पिछड़ा माना जाता था। यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर निर्भर थी और बड़े उद्योग लगभग न के बराबर थे।
पहले क्या था
गन्ना किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था
सिंचाई और परिवहन के साधन सीमित थे
रोजगार के अभाव में लोगों को पलायन करना पड़ता था
गांवों में कच्चे मकान और कमजोर आर्थिक स्थिति
औद्योगिक विकास लगभग शून्य
अब क्या विकास हुआ
भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की स्थापना (2002-03) के बाद क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया।

किसानों को सीधा लाभ: हजारों किसानों को गन्ना बेचने का स्थायी बाजार मिला और करोड़ों रुपये का भुगतान हुआ

उद्योग का विकास: कारखाने की क्षमता 2500 TCD से बढ़ाकर 3500 TCD तक की गई

रोजगार के अवसर: स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला
बिजली उत्पादन: 6 मेगावाट को-जनरेशन प्लांट से ऊर्जा उत्पादन शुरू हुआ

नए प्रोजेक्ट: एथेनॉल प्लांट जैसे नए उद्योग लगने से क्षेत्र में और निवेश व रोजगार बढ़ा

कृषि में सुधार: गन्ना खेती का क्षेत्र बढ़ा और आधुनिक तकनीक का उपयोग होने लगा
बड़ा बदलाव
जहां पहले किसान आर्थिक संकट और पलायन से जूझ रहे थे, वहीं अब उन्हें
 उचित मूल्य
 समय पर भुगतान
 स्थानीय रोजगार
 बेहतर जीवन स्तर
मिल रहा है।
निष्कर्ष
भोरमदेव शक्कर कारखाना सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि कबीरधाम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने वाला “विकास का इंजन” बन चुका है। पहले जहां गरीबी और बेरोजगारी थी, आज वहां समृद्धि और खुशहाली की नई तस्वीर नजर आ रही है।

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