
बता दें कि हंता वायरस का पहला मामला 11 अप्रैल 2026 को आया था। डच जहाज एमवी होंडियस क्रूज शिप पर बुजुर्ग डच यात्री की 11 अप्रैल को मौत हुई थी। उनकी पत्नी बाद में दक्षिण अफ्रीका में मृत मिलीं थी। 2 मई को एक जर्मन महिला की जहाज पर मौत हो गई थी। जांच में हंता वायरस के मामले सामने आए थे।
WHO के मुताबिक जहाज से जुड़े हंतावायरस के 9 केस कन्फर्म हो चुके हैं। WHO ने जहाज से लौटने वाले सभी लोगों के लिए 42 दिन आइसोलेशन की सिफारिश की है। इससे पहले सोमवार को हंतावायरस के संपर्क में आए 17 अमेरिकी यात्रियों को अमेरिका के नेब्रास्का मेडिकल सेंटर लाया गया। यहां उन्हें 42 दिनों तक निगरानी और क्वारिंटीन में रखा जाएगा।
कहीं ये अगला कोरोना तो नहीं?
दुनियाभर में हंता वायरस को लेकर फैल रहे डर के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल ने बड़ी राहत दी है। उन्होंने साफ किया है कि हंता वायरस को कोविड-19 की तरह समझना गलत है। उन्होंने कहा कि कोविड की सबसे बड़ी ताकत उसकी सुपर-स्प्रेडिंग क्षमता थी। एक व्यक्ति कुछ ही घंटों में दर्जनों लोगों को संक्रमित कर सकता था। हंता वायरस इतनी आसानी से नहीं फैलता। यह ज्यादातर उन क्लोज-सर्कल (जैसे एक ही घर में रहने वाले या बहुत करीबी लोग) तक ही सीमित रहता है जो सीधे तौर पर संक्रमित गंदगी या मरीज के बहुत पास रहे हों। इसलिए इसके पैंडेमिक यानी वैश्विक महामारी बनने की संभावना बहुत कम है।
फैलने का तरीका
हंता वायर मुख्य रूप से चूहों के जरिए फैलता है। यह हवा में तैरते हुए एक कमरे से दूसरे कमरे में नहीं जाता। यह तब फैलता है जब कोई व्यक्ति चूहों की गंदगी, पेशाब या उनके लार के सीधे संपर्क में आता है। हालांकि कुछ मामलों में एंडिस स्ट्रेन के जरिए इंसान से इंसान में फैलने की बात कही गई है, लेकिन इसकी रफ़्तार कोविड के मुकाबले बहुत ही धीमी है।



