ईरान युद्ध पर ट्रंप को बड़ा झटकाः सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए संसद में प्रस्ताव पास, अमेरिकी राष्ट्रपति को खुद की पार्टी ने भी छोड़ा साथ

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर उनकी पार्टी के ही सांसदों ने उनका साथ नहीं दिया। प्रस्ताव को कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने समर्थन दिया है। कांग्रेस का कहना है कि लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई के लिए उसकी मंजूरी जरूरी है।
इस प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि 208 सांसदों ने विरोध किया। अमेरिका की मुख्य विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट के किसी भी सांसदों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान नहीं किया। वहीं डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी के सांसद थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन ने पार्टी लाइन से हटकर डेमोक्रेट सांसदों का साथ दिया।
रिपब्लिकन सांसदों ने युद्ध की वजह से बढ़ती महंगाई और आर्थिक परेशानी, पेट्रोल-डीजल और खाद की बढ़ती कीमतों से परेशान होकर प्रस्ताव के पक्ष में समर्थन दिया है। थॉमस मैसी ने कहा कि लोग महंगे पेट्रोल, डीजल और खाद की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। उनके मुताबिक यह वोट दिखाता है कि जनता और संसद दोनों लंबे समय से चल रहे युद्ध से थक चुके हैं।
60 दिन से ज्यादा युद्ध के लिए संसद की मंजूरी जरूरी
कानून के अनुसार 60 दिन से ज्यादा चलने वाले विदेशी सैन्य अभियानों की समीक्षा करना जरूरी होता है। जबकि अमेरिका-ईरान युद्ध 28 फरवरी से चल रहा है। इसका मतलब यह 60 दिन की सीमा पार कर चुका है। वार पावर्स एक्ट के मुताबिक कांग्रेस की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति 60 दिन से अधिक समय तक सैन्य कार्रवाई जारी नहीं रख सकते। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लिए ऐसी मंजूरी नहीं ली थी। यही वजह है कि अब ट्रंप प्रशासन को ईरान युद्ध को लेकर कांग्रेस, जांच एजेंसियों और अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
अब ट्रंप के पास क्या विकल्प
यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। हालांकि इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन ‘सीनेट’ से भी पास कराना होगा। इसके बाद, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो कि बहुत मुश्किल है। हालांकि, ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद में युद्ध के अधिकारों को सीमित करने वाले तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे। लेकिन वो बेहद कम अंतर से नाकाम हो गए थे।



