वनमंडल में 14.77 लाख के गोबर खाद घोटाले में बड़ी कार्रवाई

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2022 में गोबर खाद खरीदी के नाम पर हुए फर्जी भुगतान, संदिग्ध दस्तावेजों और वित्तीय अनियमितताओं की विभागीय जांच में रमेश कुमार खैरवार की गंभीर लापरवाही और संलिप्तता प्रथम दृष्टया सही पाई गई है।
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार रमेश कुमार खैरवार 14 अगस्त 2023 से 28 दिसंबर 2025 तक मरवाही परिक्षेत्र में वनक्षेत्रपाल के पद पर पदस्थ रहे। इसी दौरान कैंपा कार्यों और वृक्षारोपण योजनाओं में सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़ी कई शिकायतें सामने आई थीं। मामले के विधानसभा तक पहुंचने के बाद विभागीय जांच तेज की गई, जिसमें वित्तीय गड़बड़ियों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भुगतान किए जाने के आरोपों की पुष्टि हुई।
वन विभाग की जांच में सामने आया है कि गोबर खाद खरीदी के नाम पर फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर राशि का अवैध समायोजन किया गया। इससे पहले इसी मामले में कैंपा शाखा प्रभारी एवं सहायक ग्रेड-2 भूपेंद्र कुमार साहू को ₹14 लाख 77 हजार 600 के अवैध लेखा समायोजन, फर्जी एलओसी तैयार कराने और जांच अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में निलंबित किया जा चुका है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। आरोप है कि बिना उचित सत्यापन के भुगतान संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए और विभागीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मामले में अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रकृति का पाया गया है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत रमेश कुमार खैरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, बिलासपुर वृत्त निर्धारित किया गया है।
देखें आदेश

मरवाही वनमंडल पिछले कुछ समय से लगातार भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और कैंपा योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर चर्चा में बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि वृक्षारोपण और वन विकास से जुड़ी योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितताएं की जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है।
अब लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों का दावा है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में विभाग के कुछ अन्य बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
विधानसभा में गूंज चुके इस हाई-प्रोफाइल मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और कैंपा योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल निलंबन से मामले का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे घोटाले की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।



