3 साल से अधूरी पड़ी जल जीवन मिशन योजना, पेयजल के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे लोग, जिम्मेदारों की अनदेखी से ग्रामीणों में नाराजी

बेलरपुर गांव के दो मोहल्लों में केवल दो हैंडपंप ही ग्रामीणों की प्यास बुझाने का सहारा बने हुए हैं। एक हैंडपंप बस्ती के भीतर है, जबकि दूसरा गांव के स्कूल परिसर में लगा हुआ है। दोनों हैंडपंपों में बोरवेल सिस्टम लगाया गया था, लेकिन बस्ती वाले हैंडपंप का बोर सिस्टम लंबे समय से खराब पड़ा है। ऐसे में लोग हैंडपंप का हैंडल चलाकर बड़ी मुश्किल से पानी निकाल पा रहे हैं। पानी भरने के लिए रोज लंबी कतार लगती है और घंटों मशक्कत के बाद लोगों को पानी नसीब हो पाता है।

दूसरे मोहल्ले के लोग स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप पर निर्भर हैं। यहां बोरवेल सिस्टम के जरिए करीब 500 मीटर दूर तक पाइपलाइन बिछाई गई थी ताकि बस्ती तक पानी पहुंच सके, लेकिन पाइपलाइन का काम अधूरा छोड़ दिया गया। सड़क किनारे पाइप का एक हिस्सा बाहर निकला हुआ है, जिसमें अतिरिक्त पाइप जोड़कर ग्रामीण पानी भरने को मजबूर हैं।

स्थिति इतनी खराब है कि गंदगी और कीचड़ के बीच लोग पाइप से पानी लेकर लंबी दूरी तय कर अपने घर पहुंचते हैं। जिस जगह से लोग पानी भरते हैं, वहीं पशु-पक्षी भी दलदल के बीच अपनी प्यास बुझाते दिखाई देते हैं। इससे ग्रामीणों में बीमारी फैलने का भी खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत दो साल पहले ही हर घर तक नल से पानी पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और पीएचई विभाग की उदासीनता के कारण योजना अधूरी पड़ी हुई है। गर्मी बढ़ने के साथ गांव में पेयजल संकट और गहरा गया है।

पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता महेश साहू ने बताया कि निर्माण कार्य में लापरवाही को लेकर ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा नहीं होने पर अनुबंध निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग ने शुरुआत में ही निर्माण एजेंसी पर सख्ती दिखाई होती और काम की निगरानी ईमानदारी से की होती, तो आज गांव के लोगों को पानी के लिए इस तरह संघर्ष नहीं करना पड़ता।



