दुर्ग में करोड़ों की जमीन डील पर संगीन आरोप: उद्योगपति दंपति पर धोखाधड़ी, जालसाजी व षड्यंत्र का केस दर्ज…

दुर्ग// जुनवानी भूमि प्रकरण ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। न्यायालय के सख्त हस्तक्षेप के बाद सुपेला पुलिस ने चर्चित उद्योगपति केतन शाह और उनकी पत्नी संगीता केतन शाह के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय व्यापारिक जगत बल्कि प्रशासनिक तंत्र में भी हलचल मचा दी है।
न्यायालय के आदेश के बाद ही जागी पुलिस!
लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे शिकायतकर्ता सुनील कुमार सोमन को आखिरकार तब राहत मिली, जब मामला न्यायालय पहुंचा। न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बाद सुपेला थाने में IPC की धारा 120B, 406, 416, 420, 467, 468, 471, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।
👉 बड़ा सवाल:
क्या बिना न्यायालय के हस्तक्षेप के ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई नहीं होती?
भूमि सौदा: एग्रीमेंट हुआ, भुगतान हुआ… लेकिन रजिस्ट्री नहीं!
शिकायतकर्ता के अनुसार—
विवादित भूमि की जानकारी छुपाकर जुनवानी स्थित जमीन का एग्रीमेंट किया गया
लाखों-करोड़ों का भुगतान भी लिया गया
इसके बावजूद रजिस्ट्री करने से लगातार इंकार किया गया
👉 आरोप यह भी कि
एक ही संपत्ति पर वित्तीय संस्था से ऋण लेकर दोहरी आर्थिक गतिविधि की गई, जिससे लगभग ₹4.60 करोड़ की भारी क्षति हुई।
पुलगांव केस: पहले भी सामने आ चुका है ऐसा ही पैटर्न
यह कोई पहला मामला नहीं है।
07 अप्रैल 2025 को पुलगांव थाने में विशाल केजरीवाल की शिकायत पर
अपराध क्रमांक 109/25, धारा 420 IPC के तहत केस दर्ज हुआ था
आरोप वही—एग्रीमेंट और भुगतान के बावजूद रजिस्ट्री नहीं
👉 यानी आरोपों का एक जैसा पैटर्न बार-बार सामने आ रहा है।
अग्रिम जमानत के बावजूद दोहराया गया कथित कृत्य
जानकारी के मुताबिक—
पुलगांव प्रकरण में संगीता केतन शाह अग्रिम जमानत पर हैं
शर्त थी कि वे इस प्रकार के विवादित कार्यों में शामिल नहीं होंगी
👉 इसके बावजूद नए आरोप सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुंबई संपत्ति मामला: FIR नहीं, सिर्फ 155 CrPC!
एक अन्य आरोप के अनुसार—
मुंबई स्थित संपत्ति के नाम पर भी धनराशि ली गई
लेकिन FIR दर्ज करने के बजाय केवल धारा 155 CrPC के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई
👉 इससे पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या यह सुनियोजित ‘मोडस ऑपेरेंडी’?
लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल उठ रहा है—
👉 क्या यह अलग-अलग विवाद हैं
👉 या फिर एक ही तरीके से बार-बार ठगी का आरोपित खेल?
यदि ऐसा है, तो मामला व्यक्तिगत नहीं बल्कि व्यापक जांच का विषय बन सकता है।
‘प्रभाव’ और ‘पहचान’ का खेल?
शिकायतकर्ता का आरोप—
संबंधित कंपनी पिछले 50 वर्षों से संचालित नामचीन प्रतिष्ठान है
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर लोगों में विश्वास बनाया जाता है
उसी विश्वास के आधार पर आर्थिक लेन-देन किए जाते हैं
👉 आरोप यह भी कि बड़े राजनीतिक संपर्कों का उपयोग कर प्रभाव जमाने की कोशिश की जाती है।
कार्रवाई में देरी: आम बनाम रसूखदार?
सबसे बड़ा सवाल यही—
एक से अधिक मामले सामने आने के बावजूद
न्यायालय को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा
👉 क्या आम नागरिक और प्रभावशाली लोगों के मामलों में
कार्रवाई की गति अलग-अलग होती है…?
CM तक गुहार, फिर भी नहीं मिला न्याय!
शिकायतकर्ता का दावा—
थाना से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत की गई
इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई
उल्टा आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई
अब क्या होगा आगे..?
सुपेला पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
👉 अब सबकी नजर इस पर है कि—
क्या जांच निष्पक्ष और तेज होगी?
क्या आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी?
या फिर मामला प्रभाव के दबाव में ठंडे बस्ते में चला जाएगा?



