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फिर धान खरीदी में बड़ा घोटाला: कबीरधाम में ‘रिसायकल खेल’ का खुलासा

कबीरधाम धान घोटाला: 3 केंद्रों से खुला बड़ा खेल, 108 केंद्रों तक जांच की मांग, सिस्टम पर गंभीर सवाल


कबीरधाम जिले में धान उपार्जन से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आने के बाद प्रशासन, राजनीति और आम जनता—तीनों स्तर पर हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में तीन उपार्जन केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, जिसके बाद संबंधित केंद्रों से वसूली की सिफारिश की गई है। साथ ही दोषी केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार लोगों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की बात भी कही गई है। इस मामले की सुनवाई कलेक्टर न्यायालय में शुरू हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला अब गंभीर प्रशासनिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, धान खरीदी के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। आरोप है कि कुछ उपार्जन केंद्रों में कागजों में धान खरीदी दिखाकर वास्तविकता में धान का “रिसायकल” किया गया—यानी एक ही धान को बार-बार खरीदी दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। इस पूरे खेल में राइस मिलरों और संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
जांच में क्या सामने आया?
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि:
खरीदी और भंडारण के रिकॉर्ड में भारी अंतर है
परिवहन और मिलिंग से जुड़े दस्तावेजों में भी विसंगतियां हैं
कई मामलों में फर्जी एंट्री और कागजी लेन-देन के संकेत मिले हैं
इन तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने संबंधित केंद्रों के खिलाफ वसूली और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की सिफारिश की है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष का हमला तेज
इस घोटाले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने पूरे मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि जिले के सभी 108 धान उपार्जन केंद्रों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता के सामने पूरी सच्चाई आ सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि:
जिले के आधे से ज्यादा केंद्रों में इसी तरह के घोटाले की आशंका है
राइस मिलरों और अधिकारियों की मिलीभगत से “धान रिसायकल सिस्टम” चलाया जा रहा है
यह संगठित नेटवर्क किसानों के हक और सरकारी धन दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है
क्या सिर्फ तीन केंद्रों तक सीमित है मामला?
सबसे बड़ा और चिंताजनक सवाल यही है कि क्या यह घोटाला केवल तीन केंद्रों तक सीमित है या फिर पूरे जिले में फैला हुआ है। जिस तरह का पैटर्न सामने आया है, उससे यह संकेत मिलते हैं कि यह कोई isolated मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
अगर जिले के सभी 108 केंद्रों की निष्पक्ष और व्यापक जांच की जाती है, तो घोटाले की राशि कई करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासनिक चुनौती और जवाबदेही का सवाल
यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो सीधे किसानों से जुड़ी है, उसमें इस प्रकार की गड़बड़ी होना बेहद गंभीर है।


अब मुख्य सवाल यह हैं:
क्या जांच निष्पक्ष और व्यापक होगी?
क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या मामला दब जाएगा?
क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी?

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