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‘एंटी पेपर लीक बिल’ कानून बना; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने परीक्षा संशोधन बिल पर मुहर लगाई, पूरे देश में लागू हुआ

Public Examinations Amendment Law: लोक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल (Anti-Paper Leak Bill) अब कानून बन गया है। संसद (लोकसभा और राज्यसभा) से पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (Droupadi Murmu) के पास भेजा गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026’ को मंजूरी दे दी। इसी के साथ ही संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो गया है।

नए कानून में पेपर लीक माफिया, संगठित नकल और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त सजा, भारी जुर्माना और त्वरित सुनवाई का प्रावधान किया गया है। इसमें अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नए कानून का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, तकनीकी सेंधमारी और अन्य प्रकार की धांधली पर पूरी तरह रोक लगाना है। इसके तहत परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह, कोचिंग संस्थान, सेवा प्रदाता और किसी भी तरह की मिलीभगत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संशोधित कानून के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) तथा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित सभी सार्वजनिक परीक्षाएं इसके दायरे में आएंगी।

बता दें की नीट परीक्षा पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने पूरे देश में प्रदर्शन किया था। पार्टी के छात्रों का भरपूर साथ मिला था। इसे लेकर दिल्ली में जमकर बवाल भी हुआ था। स्थिति यह हो गई कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा। इसके बाद मोदी सरकार पेपर लीक पर रोक लगाने और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के उद्देश्य से लोक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 लेकर आई। सरकार ने 29 जुलाई को लोकसभा और 30 जुलाई को राज्यसभा से पास करवाया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास कानून बनाने के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक दिन के भीतर इस बिल पर अपनी सहमति जताकर इसे कानून का रूप दे दिया।

परीक्षा अपराधों पर सख्त सजा और भारी जुर्माना

संशोधित कानून में परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए सजा और जुर्माने के प्रावधान पहले से अधिक कठोर किए गए हैं। अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा होगी। अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। संगठित अपराधों में 7 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दोषी सेवा प्रदाताओं पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।

दो महीने में जांच, तीन महीने में ट्रायल पूरा होगा

नए कानून के तहत पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें रोजाना सुनवाई करेंगी और तीन महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास करेंगी। इसके लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।

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