“प्रोटोकॉल से खिलवाड़ या प्रशासनिक मनमानी? भोरमदेव सफारी कार्यक्रम बना विवाद का केंद्र”

कवर्धा/पंडरिया। जिले में प्रस्तावित भोरमदेव जंगल सफारी के शुभारंभ कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम के आधिकारिक निमंत्रण पत्र से जनप्रतिनिधियों के नाम गायब होने पर अब राजनीतिक और जनस्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब लोकप्रिय विधायक भावना बोहरा का नाम निमंत्रण पत्र से हटा हुआ पाया गया। इतना ही नहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला अध्यक्ष राजेंद्र चंद्रवंशी के नाम भी आमंत्रण सूची में शामिल नहीं किए गए। इस घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कोई साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी और प्रशासनिक मनमानी का उदाहरण है। सरकारी कार्यक्रमों में निर्वाचित प्रतिनिधियों और शीर्ष नेतृत्व का नाम शामिल करना एक स्थापित परंपरा और नियम का हिस्सा होता है, जिसे दरकिनार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जा रहा है।
इस मुद्दे पर युवा मित्र मंडल सहित कई सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका साफ कहना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पंडरिया में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है—
“नाम हटाकर जनप्रतिनिधियों का कद कम नहीं होता, बल्कि प्रशासन की नीयत और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। यह पंडरिया और कवर्धा की जनता का अपमान है।”
वहीं, राजनीतिक हलकों में इसे विशेषाधिकार हनन का मामला बताया जा रहा है, जिस पर आगे कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई की भी चर्चा शुरू हो गई है।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है—स्पष्टीकरण देकर विवाद शांत करता है या फिर बढ़ते जनाक्रोश का सामना करने के लिए तैयार रहता है।



