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दिल्ली में ओपन जेल बनाने की तैयारी, हाई कोर्ट ने सरकार को 2 महीने में प्लान बनाने के दिए निर्देश

इस व्यवस्था के तहत कैदियों को दिन में बाहर जाकर काम करने की अनुमति दी जाती है, जिससे वे समाज से जुड़े रहते हैं और मानसिक तनाव भी कम होता है। हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की है और साफ किया है कि तय समयसीमा में योजना तैयार कर पेश की जाए।  मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने राज्य सरकार के अधिकारियों को इस संबंध में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह खुली जेल के लिए एक विस्तृत मसौदा (ड्राफ्ट) योजना तैयार करे। साथ ही, ऐसे कैदियों की पहचान करने के लिए स्पष्ट रणनीति बनाए जिन्हें इन संस्थानों में स्थानांतरित किया जा सकता है। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए, ताकि पात्र कैदियों को व्यवस्थित तरीके से ओपन जेल में शिफ्ट किया जा सके।

दिल्ली सरकार से मांगा हलफनामा

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में खुला सुधारक संस्थान (ओपन जेल) स्थापित करने के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में रजिस्टर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हलफनामे में 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के पालन के लिए अब तक उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी दी जाए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (OCI) के प्रबंधन के लिए एक निगरानी समिति गठित करनी होगी। यह समिति राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके नामित प्रतिनिधि की अध्यक्षता में काम करेगी।

बनाई जानी चाहिए समिति

अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि वे यह संदेश दिल्ली सरकार के गृह सचिव तक पहुंचाएं कि इस दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि एक विशेष समिति का गठन किया जाए, जो मिलकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए स्पष्ट और प्रभावी रणनीति तैयार करे। साथ ही समिति यह भी आकलन करे कि वर्तमान में इस योजना को लागू करने की स्थिति क्या है।पीठ ने साफ कहा कि सरकार को उन कैदियों की पहचान करनी होगी, जिन्हें ओपन जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है। अदालत के अनुसार, यह प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से और तय मानकों के आधार पर पूरी की जानी चाहिए।

दिल्ली सरकार को दी 2 महीने की मोहलत

राजधानी में ओपन/सेमी-ओपन जेल स्थापित करने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को दो महीने का समय देते हुए विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि तय समयसीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। कोर्ट ने कहा कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और इसका उद्देश्य जेल सुधार प्रक्रिया को मजबूत करना है।

ओपन/सेमी-ओपन जेल क्या है?

ओपन या सेमी-ओपन जेलों में कैदियों को सीमित स्वतंत्रता दी जाती हैदिन में जेल के बाहर जाकर काम करने की अनुमति शाम को वापस लौटना अनिवार्य अपेक्षाकृत कम सुरक्षा प्रतिबंध।

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