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लोकतंत्र की गूंज से गूंजा परिसर, “विकसित भारत” के संकल्प के साथ युवाओं ने दिखाई नई दिशा


नई दिल्ली। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का वाचस्पति सभागार उस समय लोकतंत्र की सशक्त आवाज़ से गूंज उठा, जब राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और MY Bharat के संयुक्त तत्वावधान में “विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट” का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों, तर्कों और राष्ट्रप्रेम का जीवंत मंच बन गया।
“50 Years of Emergency: Lessons for Indian Democracy” जैसे गंभीर विषय पर युवाओं ने जिस परिपक्वता और निर्भीकता से अपने विचार रखे, उसने यह साबित कर दिया कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। सदन की कार्यवाही का मंचन इतना सजीव था कि मानो वास्तविक संसद की तस्वीर सामने आ गई हो।
मुख्य अतिथि डॉ. संजय पासवान ने युवाओं के भीतर छिपी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि 2047 तक “विकसित भारत” का सपना तभी साकार होगा, जब युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक बनेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवाद ही लोकतंत्र की आत्मा है और विचारों का आदान-प्रदान ही राष्ट्र को आगे बढ़ाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज का युवा यदि ठान ले, तो असंभव को भी संभव बना सकता है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” संकल्प को युवाओं का मिशन बताते हुए कहा कि यह केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि हर भारतीय की जिम्मेदारी है।
विशिष्ट अतिथि संतोष कुमार श्रीवास्तव और सारस्वत अतिथि प्रो. मार्कण्डेय नाथ तिवारी ने भी युवाओं के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच न केवल प्रतिभा को निखारते हैं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी जागृत करते हैं।
कार्यक्रम में शामिल 18 प्रतिभागियों ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और तार्किक क्षमता का परिचय दिया, वह अद्भुत रहा। उनकी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि भारत का युवा केवल सपने नहीं देखता, बल्कि उन्हें साकार करने का साहस भी रखता है।
अंत में यह आयोजन एक मजबूत संदेश देकर गया—
“जब युवा जागता है, तभी राष्ट्र आगे बढ़ता है… और जब विचार जागते हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।”

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