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सड़क निर्माण की खुली पोल! 6.70 किमी मार्ग में मिली खामियां, ठेकेदार और दो इंजीनियरों को नोटिस

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने की जांच, सड़क धंसने और घटिया गुणवत्ता का मामला आया सामने

कवर्धा, कबीरधाम जिले में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम बानौ से कान्हाभैरा तक बनी 6.70 किलोमीटर लंबी सड़क निरीक्षण में कई जगह क्षतिग्रस्त और धंसी हुई मिली। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़क की यह स्थिति सामने आने पर लोक निर्माण विभाग ने संबंधित ठेकेदार सहित तत्कालीन एसडीओ और उप अभियंता को नोटिस जारी किया है।

मामले की शिकायत मिलने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर 27 अक्टूबर को पीडब्ल्यूडी कवर्धा संभाग की टीम ने संयुक्त निरीक्षण किया। जांच में सड़क की पूरी चौड़ाई में कई स्थानों पर तथा कुछ जगह बाईं ओर का हिस्सा धंसा हुआ पाया गया। सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में कम्पेक्शन की कमी भी सामने आई।

ठेकेदार को सात दिन का अल्टीमेटम

पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार मेसर्स कन्हैया लाल अग्रवाल को सात दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त सड़क को उखाड़कर जीएसबी सतह से निर्धारित मापदंडों के अनुसार सुधारने और फोटोग्राफ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। तय समय में सुधार नहीं होने पर विभाग ठेकेदार के जोखिम एवं खर्च पर मरम्मत कराएगा और इसकी राशि रोकी गई परफॉर्मेंस गारंटी से समायोजित की जाएगी।

गौरतलब है कि 6.70 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण फरवरी 2026 में पूरा हुआ था। सड़क फरवरी 2031 तक पांच साल की परफॉर्मेंस गारंटी में है। यानी निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़क में खामियां सामने आना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दो इंजीनियर भी विभागीय कार्रवाई के घेरे में

निरीक्षण में निर्माण अवधि के दौरान पर्याप्त कम्पेक्शन नहीं पाए जाने पर तत्कालीन एसडीओ उमाप्रसाद जोशी और उप अभियंता एल.आर. छत्तरे को भी नोटिस जारी किया गया है। दोनों अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर कम्पेक्शन टेस्ट की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट नहीं देने पर आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच प्रस्तावित की जाएगी।

अब सवाल यह है कि पांच साल की गारंटी वाली सड़क निर्माण के कुछ महीनों में ही क्यों धंसने लगी? निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई और जिम्मेदारों ने समय रहते खामियों पर ध्यान क्यों नहीं दिया?

फिलहाल पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई के बाद निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ठेकेदार निर्धारित समय में सड़क की मरम्मत करता है या विभाग को आगे कठोर कार्रवाई करनी पड़ती है।

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