छत्तीसगढ़प्रदेश

शहीद गुंडाधुर की धरती पर विकास की नई इबारत, सुरक्षा कैंप बने जनसेवा के केंद्र

लेखक: धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर।

बस्तर के दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहीं सरकारी योजनाएं, 70 सुरक्षा कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की पहल

रायपुर। कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे बस्तर के गांवों में अब विकास और जनविश्वास की नई तस्वीर उभर रही है। जिन इलाकों में कभी भय और असुरक्षा का माहौल था, वहां अब सुरक्षा कैंप ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग सुविधाओं और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के केंद्र बन रहे हैं।

राज्य सरकार की पहल पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके पहले चरण में 70 कैंपों को जनसुविधा केंद्रों में तब्दील किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीणों को गांव के नजदीक ही विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा बस्तर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के समग्र विकास और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, कृषि, पशुपालन और सिंचाई से जुड़ी योजनाओं के जरिए ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने की दिशा में भी काम हो रहा है।

नेतानार से शुरू हुई सेवा डेरा की पहल

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को बस्तर जिले के नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था। अब इस पहल का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।

नेतानार महान आदिवासी जननायक शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मस्थली है। उन्होंने वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह में आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। आज इसी ऐतिहासिक धरती पर स्थापित सेवा डेरा ग्रामीणों के लिए सुविधाओं और आत्मनिर्भरता का नया केंद्र बन रहा है।

एक ही छत के नीचे मिल रहीं सरकारी सुविधाएं

पहले ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने, बैंकिंग कार्य कराने और आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता था। इससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। अब सेवा डेरा के माध्यम से ऐसी कई सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

इन केंद्रों पर आधार पंजीयन एवं अपडेट, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक करने और जन्म-मृत्यु सहित विभिन्न प्रमाण पत्रों से संबंधित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने में ग्रामीणों को सहूलियत मिल रही है। इससे प्रशासनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान बनाने में मदद मिल रही है।

बैंक सखी के जरिए महिलाओं को अवसर

सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित करने की पहल भी की जा रही है। इसके जरिए ग्रामीणों को गांव में ही पैसे निकालने, जमा करने और बैंक खातों से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य परामर्श, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को ग्रामीणों के नजदीक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे विशेष रूप से उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

स्व-सहायता समूहों से बढ़ रही महिलाओं की आत्मनिर्भरता

सेवा डेरा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को रोजगार से जोड़ने का माध्यम भी बन रहा है। नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर इमली पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग के अनुसार, इस गतिविधि से जुड़कर महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार कर उसकी बिक्री के जरिए भी महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल रहा है। धान की भूसी का उपयोग पशु आहार के रूप में किया जा रहा है। इसके अलावा, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से महिलाओं को कौशल विकास और स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।

सेवा डेरा की इन गतिविधियों से स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग से बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

बस्तर के ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की टीम ने नेतानार पहुंचकर सिलाई, इमली प्रसंस्करण और पारंपरिक ढेंकी से जुड़े कार्यों का जायजा लिया।

टीम ने उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग को लेकर चर्चा की। इस पहल से स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

सुरक्षा से सेवा और स्वावलंबन तक का सफर

शहीद गुंडाधुर की धरती पर सुरक्षा कैंपों को जनसेवा के केंद्रों में बदलने की पहल बस्तर में विकास की नई दिशा को दर्शाती है। इसका उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सुविधाओं, बैंकिंग और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना भी है।

यदि इन केंद्रों पर सेवाओं की निरंतर उपलब्धता, प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्थानीय उत्पादों के लिए प्रभावी बाजार व्यवस्था सुनिश्चित होती है, तो यह पहल बस्तर के दूरस्थ गांवों में स्थायी बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सुरक्षा कैंपों से सेवा डेरों तक का यह सफर बस्तर में विकास, जनविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाओं का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

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