विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का बड़ा ऐलान: अस्पतालों में अटैचमेंट खत्म होंगे, कबीरधाम में भी वर्षों से जमे कर्मचारियों पर…

गिरेगी गाज?
समाचार (विस्तार से):
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को सदन की कार्यवाही में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया। सत्र के नौवें दिन प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में की गई अटैचमेंट नियुक्तियों को रद्द किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि कई मामलों में ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में पदस्थ कर्मचारियों को अटैचमेंट के माध्यम से शहरों के अस्पतालों में पदस्थ कर दिया गया है। इसके कारण गांवों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी हो गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने ऐसे सभी अटैचमेंट को निरस्त करने का निर्णय लिया है, ताकि ग्रामीण अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जा सके।
प्रश्नकाल के दौरान मंत्री को अपने ही दल की विधायक लता उसेंडी के सवालों का भी सामना करना पड़ा। विधायक लता उसेंडी ने स्वास्थ्य विभाग में कार्य पूर्ण होने के बावजूद भुगतान नहीं होने का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि कई ठेकेदारों ने स्वास्थ्य विभाग के कार्य पूरे कर दिए, लेकिन अब तक उनका भुगतान नहीं किया गया है।
विधायक ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी कई बार मौखिक वर्क ऑर्डर के आधार पर भुगतान कर देते हैं, जबकि कई मामलों में उसी आधार पर भुगतान से इंकार कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब नौ महीने पहले अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस मुद्दे पर विपक्षी विधायकों ने भी सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और जवाब की मांग की। इस दौरान सदन में कुछ समय तक तीखी बहस भी देखने को मिली।
वहीं कबीरधाम जिला में भी अटैचमेंट का खेल लंबे समय से चर्चा में है। यह जिला वनांचल क्षेत्र से घिरा हुआ है, जहां कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र जंगल और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है, वहीं पदस्थ कर्मचारी वर्षों से शहरों में अटैचमेंट लेकर बैठे हुए हैं।
ग्रामीणों ने कई बार इस संबंध में जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए निर्देशों का कबीरधाम सहित प्रदेश के अन्य जिलों में कितना असर पड़ेगा।
अब देखना होगा कि मंत्री के इस ऐलान के बाद वर्षों से अटैचमेंट पर जमे कर्मचारियों को वास्तव में ग्रामीण अस्पतालों में वापस भेजा जाएगा या यह निर्णय भी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।



