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दुर्ग में खनन माफिया बेखौफ, कार्रवाई गायब:– सह. खनिज अधिकारी दीपक तिवारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल…?

भू-खनन माफिया के हौसले बुलंद:– दुर्ग जिले में मिट्टी-मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी, खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल…?


दुर्ग// जिले के ग्रामीण अंचल में इन दिनों मिट्टी और मुरूम के अवैध उत्खनन तथा परिवहन का कारोबार बेखौफ तरीके से जारी है। उतई क्षेत्र (भिलाई-3) से लेकर दुर्ग ग्रामीण के चंगोरी तक खनिज संपदा का दोहन खुलेआम हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायत और जानकारी दिए जाने के बावजूद खनिज विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस जांच या कार्यवाही सामने नहीं आई, जिससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन और परिवहन का यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
चंगोरी में 35 एकड़ जमीन पर मुरूम-मिट्टी से  निजी भूमि पाटने का कार्य जारी…
दुर्ग ग्रामीण के चंगोरी क्षेत्र में बंद हो चुके एक ईंट भट्ठे की लगभग 35 एकड़ भूमि पर 10 से 12 फीट तक मिट्टी और मुरूम से पाटने का कार्य पिछले कई महीनों से जारी है। बताया जा रहा है कि इस कार्य के लिए हजारों ट्रकों के माध्यम से मुरूम और मिट्टी का परिवहन किया गया, लेकिन अधिकांश परिवहन बिना वैधानिक अनुमति और दस्तावेजों के होने का आरोप लगाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, ईंट भट्ठे के संचालक द्वारा भट्ठे का लाइसेंस निरस्त करने के लिए आवेदन दिया जा चुका है और वह अभी प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद लाखों रुपये के खनिज स्टॉक का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आ रहा, जिससे राजस्व हानि की आशंका और भी गहरा गई है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप…?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की जानकारी खनिज विभाग के सह. अधिकारी दीपक तिवारी को कई बार दी गई, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई बड़ी जांच या कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि कहीं न कहीं अवैध खनन माफियाओं और विभागीय तंत्र के बीच मिलीभगत हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, सह. अधिकारी दीपक तिवारी लंबे समय से दुर्ग जिले में पदस्थ हैं। विभागीय प्रक्रिया के तहत उनका स्थानांतरण हुआ था, लेकिन कुछ ही समय में उनकी पुनः वापसी भी हो गई। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और गतिविधियों की पूरी जानकारी रखने वाले अधिकारी द्वारा इस मामले में मौन साधे रखना भी सवालों को और गंभीर बना रहा है।
उतई के मोरीद क्षेत्र में भी अवैध खनन का आरोप
केवल चंगोरी ही नहीं, बल्कि उतई क्षेत्र के मोरीद गांव में भी मिट्टी और मुरूम के अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां से कई वर्षों से अवैध परिवहन हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता ही दिखाई देती है।
चौंकाने वाली बात यह भी बताई जा रही है कि अवैध परिवहन में लगे कुछ वाहन चालक खुलेआम कहते हैं कि “हम यह काम वर्षों से कर रहे हैं, आज तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।” इससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरा जाते हैं।
दिखावटी कार्रवाई या सुनियोजित ढील….?
हालांकि समय-समय पर खनिज विभाग द्वारा कुछ वाहनों पर कार्रवाई की खबरें जरूर सामने आती हैं, लेकिन क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि ये कार्रवाई अक्सर सीमित और दिखावटी ही होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्थानीय लोगों ने अवैध खनन के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया, लेकिन उसके बाद भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
जिलाधीश से हस्तक्षेप की उम्मीद…
लगातार सामने आ रही शिकायतों और राजस्व हानि की आशंकाओं के बीच अब नजरें जिलाधीश अभिजीत सिंह पर टिकी हैं। क्षेत्र के लोग उम्मीद जता रहे हैं कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल अवैध खनन और परिवहन में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेगा…?बल्कि विभागीय स्तर पर हुई संभावित लापरवाही या मिलीभगत की भी निष्पक्ष जांच कराएगा।
यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है तो यह भी सामने आ सकता है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन से शासन को कितने बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार…?

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