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UNESCO की टीम सिरपुर का करेगी भ्रमण, टीम को ठीक लगा तो सिरपुर विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने वाला छत्तीसगढ़ का पहला स्थल बन जाएगा

सिरपुर का इतिहास भी हड़प्पा और नालंदा जैसा ही समृद्ध रहा है 1400 साल पहले 10000 से भी ज्यादा छात्र यहां रहकर करते थे पढ़ाई

तहलका न्यूज दुर्ग// एक वक्त था जब उत्तर गुप्त काल (पांचवी सदी) में पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) का जुड़ा यहां तक हुआ करता था श्रीपुर वर्तमान सिरपुर में पांडु वंश के राजा बालादित्य की शादी सातवीं शताब्दी में पाटलिपुत्र की बेटी से हुई थी। भारत में बेटियों का विवाह अपने से बड़े या कम से काम बराबर वालों से किया जाता है यानी मेरे आस-पास की यह सभ्यता भी संपन्न नहीं थी।

खनन के बाद मिले ठीवरदेव में दो पत्थरों को जोड़ने के लिए बीच में सरिया का भी इस्तेमाल किया जा गया है, इसके अलावा यहां मुख्य द्वार पर हाथियों को बढ़ने के लिए जमीन में बने दो कुंड भी मिले हैं। इससे पता चलता है कि हाथी पालने वाले यहां के लोग वह बहुत वैभवशाली थे। अगर सिरपुर को पूरी तरह से दुनिया के सामने ले आया तो हड़प्पा और नालंदा के साथ-साथ इसका भी दुनिया भर में नाम जाना जाएगा। यूनेस्को की टीम ने नायाब कल के लिए मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और खास कलात्मक शैली के प्रसिद्ध ताजमहल को विश्व धरोहर का दर्जा दिया है, ऐसे में सिरपुर के भी अच्छे दिन आने की संभावना प्रबल है।

यूनेस्को में शामिल होने के लिए निम्न 10 शर्तों में से एक का भी पूरा होना काफी है, सिरपुर तो कम से कम पांच शर्तें पूरी कर रहा है

पहला. वास्तु कला का स्मारकीय कला, नगर योजना

दूसरा. रचनात्मक प्रतिभा की उत्कृष्ट कृति

तीसरा. खास परंपरा की गवाही जो भले ही लुप्त हो चुकी हो

चौथा. प्राकृतिक सौंदर्य के क्षेत्र को शामिल करना

पांचवा. इमारत जो इतिहास में महत्वपूर्ण चरणों को दिखाएं

छठवा. परंपराओं के साथ किसी न किसी तरह से जुड़ा होना

सातवा. जल मार्ग का उपयोग जो संस्कृति के साथ जुड़े

आंठवा. जैविक प्रक्रियाओं का प्रतिनिधित्व

नौंवा. इतिहास के प्रमुख चरणों का प्रतिनिधित्व का उदाहरण

दशवा. जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास

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