बोड़ला हिंदू संगम स्थल के निर्माण पर गंभीर सवाल, एस्टीमेट और गुणवत्ता को लेकर उठी जांच की मांग

कवर्धा/बोड़ला। नगर पंचायत बोड़ला के वार्ड क्रमांक 10 स्थित हिंदू संगम स्थल में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नाली और आहता (बाउंड्रीवॉल) निर्माण में कथित तौर पर स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों ने निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की जा रही सामग्री और तकनीकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एस्टीमेट के विपरीत निर्माण का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाली निर्माण में स्वीकृत प्रावधानों के विपरीत गिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह बाउंड्रीवॉल निर्माण में सरिया की संख्या और निर्धारित मोटाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जहां निर्धारित एस्टीमेट के अनुसार अधिक संख्या में सरिया और तय माप का सरिया इस्तेमाल होना चाहिए, वहां कथित रूप से कम संख्या और अलग माप के सरिये का उपयोग किया जा रहा है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे निर्माण की मजबूती और भविष्य में उसकी टिकाऊ क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
“इंजीनियर नहीं है” तो करोड़ों के काम की निगरानी कौन कर रहा?
मामले में नगरवासियों का सबसे बड़ा सवाल नगर पंचायत की तकनीकी निगरानी व्यवस्था को लेकर है। स्थानीय लोगों के अनुसार शिकायत करने पर नगर पंचायत की ओर से इंजीनियर की कमी की बात कही जाती है।
जनता का सवाल है कि यदि नगर पंचायत में स्थायी इंजीनियर या तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है, तो इतने बड़े निर्माण कार्य का लेआउट, माप, गुणवत्ता परीक्षण और बिल भुगतान की तकनीकी प्रक्रिया किस व्यवस्था के तहत हो रही है?
नगर पंचायत के अधिकारियों का पक्ष है कि कर्मचारियों और इंजीनियर की कमी से निर्माण कार्यों की निगरानी प्रभावित हो रही है। वहीं प्रशासन से स्थायी तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध कराने की मांग भी रखे जाने की बात सामने आई है।
ठेकेदार और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी उठे सवाल
निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों द्वारा मिलीभगत और कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि निर्माण कार्य किस एस्टीमेट के तहत स्वीकृत हुआ, मौके पर कितना काम हुआ, किस गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल की गई और उसका तकनीकी परीक्षण किस स्तर पर किया गया।
लाखों की लागत से बने गार्डन को हटाने पर भी सवाल
हिंदू संगम स्थल पर पहले से विकसित गार्डन को हटाए जाने को लेकर भी स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले लाखों रुपये खर्च कर विकसित किए गए गार्डन को हटाकर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है।
नगरवासियों का सवाल है कि यदि पूर्व में सरकारी राशि से विकसित संरचना उपयोगी थी तो उसे हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस संबंध में पूर्व और वर्तमान निर्माण की लागत, स्वीकृति और उपयोगिता की भी जांच की मांग की जा रही है।
भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क से सटाकर बाउंड्रीवॉल
बाउंड्रीवॉल की स्थिति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाउंड्रीवॉल का निर्माण सीसी रोड से सटाकर किया जा रहा है, जबकि इस मार्ग का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं।
वार्ड क्रमांक 10 में बड़ी आबादी निवास करती है और क्षेत्र में धान खरीदी केंद्र भी है। धान खरीदी के दौरान 12 चक्का समेत भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क की उपयोगी चौड़ाई प्रभावित होने पर भविष्य में जाम और दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
लोगों ने मांग की है कि बाउंड्रीवॉल की स्वीकृत सीमा और सड़क की वास्तविक चौड़ाई का मौके पर तकनीकी मापन कराया जाए।
कलेक्टर से जांच की उम्मीद
नगरवासियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जांच टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री के नमूने, सरिया की मात्रा एवं माप, गिट्टी की गुणवत्ता, बाउंड्रीवॉल की डिजाइन, सड़क की चौड़ाई और स्वीकृत एस्टीमेट का भौतिक सत्यापन करे।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि निर्माण कार्य की निगरानी किस अधिकारी की जिम्मेदारी है और यदि जांच में निर्धारित मापदंडों से विचलन पाया जाता है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल हिंदू संगम स्थल का निर्माण कार्य आरोपों के घेरे में है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। तकनीकी जांच ही यह तय करेगी कि लगाए जा रहे गुणवत्ता संबंधी आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है।



