दुर्ग विवि कुलसचिव की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, पद के दुरुपयोग मामले में जांच को दी थी चुनौती…

महिला शुभांगी मराठे ने विश्वविद्यालय में कभी भी कोई काम नहीं किया। कुलदीप के निर्देश पर वेतन महिला सिर्फ महीने के अंतिम दिन विश्वविद्यालय आती थी, और उपस्थिति पंजी में पूरे महीने का हस्ताक्षर करके जाती थी। वेतन आने पर कुलसचिव के निर्देशानुसार महिला 2200 रुपए अपने खाते में रखती थी, बाकी की रकम लगभग 9000 रुपए कुलसचिव के पुत्र उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर कर देती थी।
जून महीने के अंत में जब महिला हस्ताक्षर करने आई तो उसी दिन उसने इसकी जानकारी विश्विद्यालय प्रशासन को दी, तथा लिखित में आवेदन देकर पूरा वेतन दिलाने और विश्विद्यालय में कार्य पर नियोजित करने की मांग की। महिला ने अपने पासबुक की छायाप्रति, शपथपत्र, बैंक स्टेटमेंट, यूपीआई ट्रांजेक्शन के सबूत भी प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय ने तथ्यान्वेषण समिति ( फैक्ट फाइंडिंग कमेटी) गठित किया और समिति से सारे तथ्यों की जांच करवाई।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट से स्पष्ट था कुलसचिव ने आपराधिक न्यास भंग का सुनियोजित अपराध किया है। एसएसपी दुर्ग को कमेटी की रिपोर्ट सौंपकर उचित विधिक कार्यवाही करने का अनुरोध किया जिस पर कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के विरुद्ध मोहन नगर थाने में 3 अगस्त को धारा 316 (4) के तहत जुर्म दर्ज किया गया है। इस एफआईआर को रद्द करने की याचिका कुलसचिव ने उच्च न्यायालय में लगाई है। साथ ही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन, उसकी रिपोर्ट को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका लगाई थी।
याचिका में छत्तीसगढ़ राज्य, सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग कुलपति, सहायक कुलसचिव, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, जांच समिति की समन्वयक एवं अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) डॉ. नीलू श्रीवास्तव के साथ हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अर्द्धकुशल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे, को प्रतिवादी बनाया गया था।



