फर्जी जाति प्रमाण-पत्र पर बड़ी कार्रवाई: चीफ इंजीनियर के.के. कुटारे का प्रमाण-पत्र निरस्त, बर्खास्तगी तय मानी जा रही

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के एक बड़े मामले में उच्च स्तरीय जाति प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने सख्त फैसला सुनाते हुए चीफ इंजीनियर के.के. कुटारे के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया है। समिति के इस निर्णय के बाद उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।
समिति की जांच में यह सामने आया कि कुटारे पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप लगे थे। मामले की शिकायत वीरेंद्र चौकर और विजय मिश्रा ने की थी। वर्ष 2017 से 2025 के बीच कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिसके बाद राज्य के आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के स्तर पर विस्तृत पत्राचार और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।
उच्च स्तरीय समिति के चेयरमैन प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा हैं। समिति में डॉ. सारांश मित्तर, विनीत नंदनवार, लोक शिक्षण संचालक रितुराज रघुवंशी, रमा उइके, डॉ. अनिल वितुलकर तथा सदस्य सचिव हिना अनिमेष नेताम शामिल हैं। समिति ने सभी दस्तावेजों और अभिलेखों का गहन परीक्षण किया।
जांच के दौरान कुटारे को अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई का अवसर भी दिया गया। उन्हें 28 जनवरी 2026 और 5 फरवरी 2026 को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन तिथियों पर सुनवाई नहीं हो सकी। बाद में 23 फरवरी 2026 को हुई बैठक में मामला फिर रखा गया, हालांकि उस दिन भी वह उपस्थित नहीं हो सके और अगली तिथि देने का अनुरोध किया था।
समिति ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले Action Committee on Issue of Caste Certificate बनाम Union of India (1994) का हवाला दिया। इस फैसले में स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची राज्य-विशेष होती है और व्यक्ति को उसी राज्य में इसका लाभ मिल सकता है, जहां उसका मूल निवास हो।
दस्तावेजों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुटारे ने अपना मूल निवास महाराष्ट्र के तुमसर क्षेत्र का बताया है। जांच में तुमसर नगर पालिका के अगस्त 1935 के जन्म रजिस्टर की प्रति भी सामने आई, जिसमें उनके दादा झुकल्या-गोविंदा का नाम दर्ज है और उनकी जाति खटीक लिखी गई है।
इन सभी अभिलेखों और प्रमाणों के आधार पर समिति ने विस्तृत परीक्षण के बाद के.के. कुटारे के अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तेज होने की संभावना है और सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।



