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विधायक भावना बोहरा के प्रयासों से रेंगाबोड़ (कुंडा) व्यपवर्तन योजना को 63.80 करोड़ की मंजूरी, 8 गांवों के हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ


पंडरिया।
पंडरिया विधानसभा क्षेत्र की जनता और किसान भाइयों की वर्षों पुरानी बहुप्रतीक्षित मांग आखिरकार पूरी हो गई। विधायक भावना बोहरा के सतत प्रयासों से डबल इंजन भाजपा सरकार ने रेंगाबोड़ (कुंडा) व्यपवर्तन योजना हेतु ₹63 करोड़ 80 लाख की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील व विकासोन्मुखी सरकार ने क्षेत्र को यह बड़ी सौगात दी है।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना ग्राम बनियाकुबा, रेंगाबोड़ (कुंडा), ओड़ाडबरी, लोखान, सेन्हाभाटा, दुल्लापुर, बर्घरा एवं भुवालपुर सहित आसपास के गांवों के हजारों किसानों के लिए जीवनरेखा साबित होगी। योजना पूर्ण होने पर लगभग 1620 हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसान अब केवल मानसून पर निर्भर नहीं रहेंगे और कृषि उत्पादन के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस अवसर पर विधायक भावना बोहरा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्रवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल सिंचाई सुविधा नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार, रोजगार सृजन और पंडरिया विधानसभा के समग्र विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम है। लंबे समय से लंबित सिंचाई समस्या का समाधान कर यह योजना क्षेत्र को नई गति देगी।
उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार बनने के बाद पंडरिया विधानसभा निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इससे पूर्व भी किसानों के हित में बकेला के पास हाफ नदी व्यपवर्तन योजना, फिडर एवं रमतला जलाशय शीर्ष कार्य, नहरों का रिमॉडलिंग, क्रांति व देवसरा जलाशयों की नहर लाइनिंग व विस्तारीकरण, सुतियापाट मध्यम सिंचाई परियोजना सहित लगभग 121 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाएं आकार ले रही हैं।
इसके साथ ही महीडबरा जलाशय शीर्ष कार्य, नहर संरचनाओं का जीर्णोद्धार, आगर नदी पर छीरपानी एनीकट, ग्राम अमनिया में कन्हैया नाला एनीकट-कम-काजवे तथा उद्वहन सिंचाई योजनाएं भी प्रगति पर हैं।
भावना बोहरा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में डबल इंजन भाजपा सरकार मोदी की गारंटी को जमीन पर उतार रही है और किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से जल संचय क्षमता कई गुना बढ़ेगी, किसानों को बारहमासी जल स्रोत मिलेंगे और क्षेत्र को कृषि के क्षेत्र में नई पहचान प्राप्त होगी।

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