बोड़ला नगर में अवैध कब्जे बेलगाम: अधिकारियों की चुप्पी से जनता में आक्रोश

राजस्व जमीन पर धड़ल्ले से कब्जा, SDM–तहसीलदार–नगर पंचायत अधिकारी को लिखित शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं
(कबीरधाम)। बोड़ला नगर पंचायत अंतर्गत शासन की जमीन पर अवैध कब्जा तेजी से बढ़ता जा रहा है। नगर के विभिन्न वार्डों में कई लोगों द्वारा राजस्व भूमि पर अवैध निर्माण कार्य कर प्रशासन को खुली चुनौती दी जा रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इसकी लिखित और मौखिक शिकायतें कई बार की गईं — न केवल नगर पंचायत के अधिकारियों को, बल्कि उपखंड अधिकारी (SDM), तहसीलदार और नायब तहसीलदार तक को — बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
बोड़ला विकासखंड में विभागीय अनुशासन, पारदर्शिता और जनसमस्याओं के समाधान हेतु शासन द्वारा तीन शिक्षित महिला अधिकारियों — SDM, तहसीलदार और नायब तहसीलदार — की नियुक्ति की गई है। फिर भी राजस्व जमीन पर खुलेआम हो रहे अतिक्रमण को लेकर उनकी चुप्पी जनता के बीच भ्रम और आक्रोश पैदा कर रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने नगर पंचायत अधिकारी को भी कई बार लिखित रूप से और प्रत्यक्ष मिलकर शिकायतें दी हैं। बावजूद इसके न तो निर्माण रोके गए, न ही अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस कार्रवाई की गई। इससे यह सवाल उठता है — क्या प्रशासन अतिक्रमण को मौन स्वीकृति दे रहा है?
नेशनल हाईवे पर भी जारी अतिक्रमण:
राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के बाद संबंधित हितग्राहियों को मुआवजा राशि SDM कार्यालय के माध्यम से दी जा चुकी है। फिर भी हाईवे किनारे कई स्थानों पर फिर से अवैध कब्जे शुरू हो चुके हैं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में यातायात और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है।
जनता की मांग:
स्थानीय नागरिकों और अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित पार्षदगण और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और राज्य शासन से मांग की है कि—
1. तत्काल प्रभाव से सभी अवैध निर्माण व अतिक्रमणों की जांच हो,
2. दोषी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए,
3. और जिम्मेदारों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
अगर समय रहते प्रशासन ने इस पर सख्ती नहीं बरती, तो इससे न केवल शासन की साख को ठेस पहुंचेगी, बल्कि कानूनी और सामाजिक व्यवस्था भी बाधित हो सकती है।