मराठी’ पर महाराष्ट्र में महाजंगः कारोबारियों की रैली के खिलाफ सड़कों पर उतरे राज ठाकरे के कार्यकर्ता, पुलिस ने किया डिटेन, CM फडणवीस बोले- ‘ये लोग जान बूझकर…,

हिंदी-मराठी भाषा (Hindi-Marathi language) पर महाराष्ट्र में महाजंग जारी है। फूड स्टॉल मालिक को मराठी न बोलने पर पीटे जाने की घटना के बाद व्यापारी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। व्यापारी संगठनों के विरोध के खिलाफ आज राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS Protest) ने रैली निकाली। पुलिस ने मनसे को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। बावजूद इसके मनसे कार्यकर्ता सड़कों पर उतर पड़े। इसके चलते पहले राज ठाकरे की मनसे के नेताओं को डिटेन किया गया। साथ ही प्रदर्शन स्थल पर आए प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया।
रैली बिना पुलिस की अनुमति के निकाली गई थी और इसके चलते ठाणे जिले में भारी जाम और तनाव का माहौल बन गया। रैली शुरू होने से पहले ही पुलिस ने MNS के ठाणे और पालघर प्रमुख अविनाश जाधव समेत कई प्रमुख नेताओं को सुबह 3:30 बजे ही हिरासत में ले लिया।
.मामले में देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह लोग जान बूझकर ऐसे मार्ग चुन रहे थे, जिससे बवाल हो। फडणवीस ने बताया, “मैंने पुलिस से पूछा कि अनुमति क्यों नहीं दी गई? मार्ग के बारे में चर्चा हुई, लेकिन वे जानबूझकर ऐसा मार्ग मांग रहे थे जिससे टकराव हो। उन्हें मार्च का नियमित मार्ग बताया गया। हालांकि, उन्होंने मना कर दिया और अनुमति नहीं दी गई, लेकिन उन्होंने जानबूझकर कानून व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की
मार्ग बदलने के लिए कहा गया लेकिन सुना नहीं’- देवेंद्र फडणवीस
सीएम फडणवीस ने आगे कहा, “मार्च के लिए कोई खास मार्ग मांगना गलत है। अगर कानून व्यवस्था का मुद्दा है तो यह सही नहीं है। पांच संगठन मुंबई में मार्च निकालने की बात भी कर रहे थे। अगर वे कल मार्ग पर चर्चा भी करते हैं तो तुरंत अनुमति दे दी जाएगी, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि यही मार्ग है जो हम चाहते हैं और यही हम चाहते हैं। उन्हें मार्ग बदलने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने नहीं सुना।
मीरा रोड पर पहुंचे थे मनसे कार्यकर्ता
दरअसल मराठी भाषा आंदोलन के मनसे और अन्य मराठी संगठनों के नेता-कार्यकर्ता मीरा रोड पर पहुंचे थे। राज ठाकरे के कार्यकर्ता मीरा रोड में दाखिल हुए, तब वहां भारी पुलिस बल तैनात था। मनसे का कहना था कि आज यह तय होगा कि पुलिस की संख्या ज्यादा है या मनसैनिकों की? आंदोलन शुरू होने से पहले कई मनसे कार्यकर्ताओं को डिटेन किया गया।
आपातकाल जैसी स्थितिः MNS
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए MNS नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि, “यह स्थिति आपातकाल जैसी है। हमारे नेताओं को सुबह-सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि गुजराती व्यापारियों की रैली को पूरा सम्मान दिया जा रहा है। क्या यह महाराष्ट्र सरकार है या गुजरात की सरकार?” उन्होंने आगे कहा, “सरकार चाहे जो करे, मराठी लोगों की यह रैली होकर ही रहेगी।
पिटाई की घटना और व्यापारी समुदाय की नाराजगी
दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब इस महीने की शुरुआत में मीरा-भायंदर इलाके में एक फूड स्टॉल मालिक को कुछ MNS कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इसलिए पीट दिया था क्योंकि वह मराठी में बात नहीं कर रहा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद व्यापारी समुदाय में भारी नाराजगी देखी गई। इस घटना के विरोध में व्यापारियों ने एक शांतिपूर्ण रैली की योजना बनाई थी। MNS ने इसे मराठी अस्मिता के खिलाफ बताया और विरोध में खुद रैली निकाली।



