बीजापुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार की ओर से बड़े दावे किए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य रखा था और मार्च 2026 में बीजापुर से जुड़े अभियानों के बाद सरकार की ओर से बस्तर में नक्सली नेतृत्व के खत्म होने की बात कही गई थी।लेकिन अब बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक के मुर्दोंडा गांव से सामने आया एक धमकी भरा पत्र इन दावों के बीच जमीनी स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। गांव में सरपंच समेत तीन लोगों को कथित तौर पर
‘लाल सलाम’ के नाम से धमकी दी गई है। पत्र में गौठान के सामने स्कूल नहीं बनाने की चेतावनी दी गई है और बात नहीं मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी का उल्लेख है।
नक्सलवाद खत्म, फिर किसकी धमकी?
मुर्दोंडा गांव में धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर क्षेत्र में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो इस तरह के धमकी भरे पत्र ग्रामीणों तक कैसे पहुंच रहे हैं?हालांकि, अभी यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि पत्र वास्तव में किसी प्रतिबंधित नक्सली संगठन द्वारा ही भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और पत्र भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान की जा रही है। इसलिए फिलहाल इसे नक्सली संगठन की कार्रवाई के तौर पर अंतिम रूप से कहना जल्दबाजी होगी।फिर भी घटना ने सरकार के उन दावों पर बहस जरूर तेज कर दी है, जिनमें बस्तर को नक्सल हिंसा से मुक्त होने की बात कही गई है।
स्कूल निर्माण को लेकर धमकी, ग्रामीणों में दहशत
जानकारी के मुताबिक, धमकी भरे पत्र में गौठान के सामने स्कूल निर्माण नहीं करने को कहा गया है। चेतावनी की अनदेखी करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही गई है।स्कूल जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़े निर्माण को लेकर इस तरह की धमकी सामने आने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। खासकर ऐसे इलाके में, जहां वर्षों तक हिंसा के कारण शिक्षा और विकास प्रभावित रहे हैं, वहां स्कूल निर्माण को लेकर सामने आई धमकी प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच सवाल
बस्तर में नक्सल प्रभाव कम होने और बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद सरकार लगातार सुरक्षा और विकास की नई तस्वीर पेश कर रही है। सरकारी स्तर पर यह भी बताया गया है कि हिंसा के दौर से निकलकर बस्तर में स्कूल और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।ऐसे समय में बीजापुर के एक गांव में स्कूल निर्माण रोकने के लिए धमकी मिलना कई सवाल खड़े करता है।
क्या नक्सलवाद का प्रभाव वास्तव में पूरी तरह समाप्त हो गया है?
क्या ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत हो चुकी है, जितना सरकारी दावों में बताया जा रहा है?
और अगर यह धमकी नक्सली संगठन से जुड़ी नहीं है, तो इसके पीछे कौन है और इतनी हिम्मत उसे कहां से मिली?इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
पुलिस जांच से सामने आएगी असली तस्वीर
फिलहाल धमकी की सूचना पुलिस को दी जा चुकी है और मामले की जांच जारी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि पुलिस पत्र की वास्तविकता और उसके स्रोत का पता लगाए।यदि जांच में नक्सली संगठन की संलिप्तता सामने आती है, तो यह नक्सलवाद के पूरी तरह खत्म होने के दावों के बीच गंभीर सवाल खड़ा करेगा। वहीं यदि पत्र किसी स्थानीय व्यक्ति या अन्य समूह द्वारा भेजा गया है, तो भी गांव में भय पैदा करने वाली इस घटना पर कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन से जवाबदेही तय करने की जरूरत होगी।फिलहाल मुर्दोंडा गांव के ग्रामीण पुलिस जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।
बीजापुर की यह घटना सिर्फ एक धमकी भरे पत्र का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी सामने रखती है कि सरकारी दावों के बीच बस्तर के दूरदराज इलाकों में सुरक्षा और प्रशासन की वास्तविक स्थिति आखिर क्या है।