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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व का परिणाम, नई रेत नीति से छत्तीसगढ़ में खनन व्यवस्था का कायाकल्प…

छत्तीसगढ़ की नई रेत खनन नीति, पारदर्शिता, पर्यावरण और विकास का संगम बन चुकी है। साय सरकार के सुशासन में छत्तीसगढ़ पारदर्शिता और विकास के नए मानकों के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है । इस नई नीति से रेत खनन के नियमन के साथ राज्य में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन, माफिया तंत्र और संसाधनों के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

पारदर्शिता है रेत खनन में नई व्यवस्था का आधार

पहले भी रेत खनन को लेकर राज्य सरकार के सम्मुख कई प्रकार की समस्याएं थीं। रेत खनन कि चुनौतियों में शामिल थीं खदानों की संख्या में कमी, रेत का अवैध उत्खनन, ठेकेदारों की मनमानी और ऊँची दर। इन समस्याओं ने आम नागरिकों के साथ ही साथ निर्माण कार्यों को भी प्रभावित किया हुआ था मगर छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने इन चुनौतियों को स्वीकार किया और खनिज नीति में व्यापक सुधार लाया। नई रेत नीति के अनुसार, अब रेत खदानों को सरकारी उपक्रमों जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) के लिए आरक्षित किया जा सकेगा। राज्य सरकार का यह निर्णय निजी ठेकेदारों के एकाधिकार को समाप्त कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला सिद्ध हुआ है।

कानून के कड़े शिकंजे से अवैध खनन पर बढ़ाई गई सख़्ती

नई रेत नीति का सबसे प्रभावशाली पक्ष है अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई। अब अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर 25 हजार रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा उत्खनन मशीनों की जब्ती, एफआईआर और न्यायालयीन कार्यवाही भी की जा रही है। वर्ष 2024-25 से जून 2025 तक हजारों मामलों में कार्रवाई कर करोड़ों रुपये की वसूली की जा चुकी है राज्य सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सरकार नीति बनाने के साथ ही साथ उसे लागू करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

डिजिटल व्यवस्था से हो रही पारदर्शी नीलामी

छत्तीसगढ़ में रेत खदानों के आवंटन में पारदर्शिता लाने के लिए रिवर्स ऑक्शन पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। MSCTC के साथ हुए समझौते में यह सुनिश्चित किया गया है कि खदानों की नीलामी निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धात्मक और पारदर्शी हो। डिजिटल व्यवस्था रेत खदानों के आवंटन में भ्रष्टाचार को कम करने के साथ राज्य के राजस्व में वृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।

नई रेत नीति कर रही पर्यावरण का संरक्षण और विकास के साथ संतुलन

खनन गतिविधियों का पर्यावरण पर गम्भीर प्रभाव पड़ता है। छत्तीसगहर की साय सरकार ने इस दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए राज्य में तीन Environmental Impact Assessment Committees का गठन किया है। IIT रुड़की की एक रिपोर्ट जिसमें अनुसार यदि खनन वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से की जाए तो नदियों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। राज्य की रेत नीति भी इसी वैज्ञानिकता पर आधारित है।

आम जनता को राहत दे रही है रेत की सुलभ उपलब्धता

रेत की उपलब्धता को आसान और सस्ती बनाना नई नीति का एक प्रमुख उद्देश्य है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को रॉयल्टी में छूट देकर सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को बड़ी राहत देने का काम किया है। इसके अतिरिक्त आने वाले वर्षों में 300 से अधिक नई खदानों को मंजूरी देने की योजना है, जिससे निर्माण कार्यों को और भी रफ़्तार मिलेगी और बाजार में रेत की कमी भी दूर होगी।

औद्योगिक विकास को भी दिया जा रहा है बढ़ावा

कैबिनेट के अन्य निर्णयों में औद्योगिक भूमि और भवन प्रबंधन नियमों में संशोधन भी शामिल है। इस कदम से लैंड बैंक भूखंडों के लिए एप्रोच रोड, “Clear Eligibility” और पीपीपी मॉडल के तहत निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

छत्तीसगढ़ की साय सरकार का यह निर्णय राज्य को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

छत्तीसगढ़ की नई रेत खनन नीति एक प्रशासनिक निर्णय होने के साथ ही साथ सुशासन की एक ऐसी मिसाल भी है जो यह नीति दर्शाती है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और नेतृत्व दूरदर्शी हो तो प्रत्येक संसाधन का प्रबंधन जनहित में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व ने यह साबित कर दिया है कि पारदर्शिता और विकास साथ-साथ चल सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता, अवैध खनन पर सख्ती और आम जनता को राहत देने वाले निर्णय छत्तीसगढ़ को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं। राज्य के आर्थिक विकास को गति देने वाली यह नीति आने वाले दिनों में अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल साबित होगी।

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