दुर्ग में बेखौफ खनन माफिया, कार्रवाई नदारद, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल…



दुर्ग// जिले में अवैध उत्खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। विशेषकर धमधा ब्लॉक के ग्राम मुढ़ीपार (परसोदा रोड) में मछली पालन के नाम पर खुलेआम मुरूम उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी वैध अनुमति के चल रही इस गतिविधि की जानकारी खनिज विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को बार-बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
सूचना के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई…
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों द्वारा कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद विभाग की ओर से चुप्पी साध ली गई है। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिरकार कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं…?
राजस्व को भारी नुकसान, विभाग मौन…?
अवैध उत्खनन के चलते शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बावजूद इसके खनिज विभाग की निष्क्रियता समझ से परे है। जब खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हों, तब विभाग का मौन रहना कई संदेहों को जन्म देता है।
मिलीभगत या राजनीतिक दबाव….?
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या खनिज विभाग के अधिकारी अवैध खनन माफियाओं से मिलीभगत कर रहे हैं या फिर किसी राजनीतिक दबाव में कार्रवाई से बच रहे हैं…?
दिन-रात जारी है अवैध खनन…?
सूत्रों के अनुसार, माफिया दिन और रात दोनों समय मुरूम और मिट्टी का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। भारी वाहनों के जरिए लगातार परिवहन हो रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि ग्रामीण सड़कों की हालत भी खराब हो रही है।
ग्रामीण अंचलों में बेलगाम हो रहे माफिया…
दुर्ग जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध उत्खनन का यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। प्रशासन की ढिलाई के चलते माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं।
जिम्मेदार कौन…?
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा…? क्या प्रशासन अब भी चुप रहेगा या फिर अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए कोई सख्त कदम उठाए जाएंगे…?
कार्रवाई की मांग तेज…
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।



