फूलों की बरसात, नगाड़ों की गूंज और राम नाम के जयकारों से गूंजा नामदेव सामाजिक भवन – तेरस होली पर दिखा भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम



कवर्धा (कबीरधाम)। धर्म नगर स्थित नामदेव सामाजिक भवन में होली तेरस के पावन अवसर पर ऐसा भव्य और यादगार आयोजन हुआ, जिसने पूरे नगर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नामदेव समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति, संस्कृति और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के तैलचित्र के समक्ष विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर की गई। जैसे ही दीप प्रज्वलित हुआ, पूरा वातावरण “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद आदित्य वहनीय और उनकी टीम ने मंच संभाला और हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के साथ भक्ति की ऐसी अलख जगाई कि उपस्थित हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया।
भक्ति में डूबा माहौल:
हनुमान चालीसा के गूंजते स्वर, ढोल-नगाड़ों की ताल और 108 बार राम नाम के जाप ने पूरे भवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु झूमते नजर आए और हर कोई भक्ति के रंग में रंगा दिखा।
फूलों की होली ने बढ़ाया आकर्षण:
जैसे ही भक्ति कार्यक्रम समाप्त हुआ, माहौल रंगों से सराबोर हो गया। गुलाल के साथ-साथ फूलों की होली खेली गई, जहां लोगों ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा कर प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। फाग गीतों की मधुर धुन और नगाड़ों की गूंज पर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं जमकर झूमे।
जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी उपस्थिति:
इस भव्य आयोजन में नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, वार्ड पार्षद दीपक सिंहा, नामदेव समाज के नव नियुक्त जिला अध्यक्ष चंद्रा नामदेव सहित समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और महिला मंडल की अध्यक्ष एवं सदस्यगण बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने मिलकर आयोजन की सराहना की।
संत नामदेव की गाथा से मिला प्रेरणा संदेश:
नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने अपने उद्बोधन में संत शिरोमणि नामदेव महाराज के जीवन और उनकी भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी समाज को एकता, सेवा और सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मिठास और भाईचारे के साथ समापन:
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर होली की शुभकामनाएं दीं। हंसी-खुशी और भाईचारे के इस माहौल ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
कुल मिलाकर, नामदेव सामाजिक भवन में आयोजित यह तेरस होली सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।




