खनिज अधिकारी दीपक तिवारी की चुप्पी से फल-फूल रहा अवैध खनन..? क्या दुर्ग कलेक्टर को भी कर रहे गुमराह..?

राजा स्टील संचालक (मनोज) पर मुरूम ‘लूट’ के गंभीर आरोप, शासन को करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका…
दुर्ग// (ग्रामीण) दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत चंगोरी और बिरेझर क्षेत्र में अवैध मुरूम/मिट्टी खनन अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम होता दिखाई दे रहा है। नदी के मुहाने से लेकर लगभग 35 एकड़ तक फैले ईंट भट्टा क्षेत्र में भारी पैमाने पर मुरूम की पटिंग और अवैध परिवहन जारी है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों, फोटो, लोकेशन और जमीनी साक्ष्यों के बावजूद जिला खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी दीपक तिवारी की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
नदी मुहाने से 35 एकड़ तक मुरूम की ‘लूट’
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार चंगोरी क्षेत्र में नदी के मुहाने के पास स्थित लगभग 35 एकड़ भूमि से हजारों गाड़ियों में मुरूम/मिट्टी का परिवहन किया जा चुका है। इस पूरे कार्य से संबंधित कोई वैधानिक अनुमति, रॉयल्टी रसीद या खनिज पास सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। यह सीधे तौर पर अवैध खनन और अवैध परिवहन की श्रेणी में आता है, जिससे शासन को लाखों नहीं, करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
बिरेझर में खेत नहीं, खदान तैयार
बिरेझर क्षेत्र के किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि राजा स्टील के संचालक मनोज द्वारा खेत समतलीकरण के नाम पर 8 से 10 फीट तक गहरी खुदाई कर मुरूम निकाल लिया गया। परिणामस्वरूप उपजाऊ खेत अब गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। किसानों का कहना है कि अब उन्हें अपने ही खेतों को फिर से खेती योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च और भारी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतें पहुँचीं, कार्रवाई शून्य…?
इन सभी मामलों की जानकारी जिला खनिज विभाग को समय-समय पर दी गई। इसके बावजूद न तो मौके का प्रभावी निरीक्षण हुआ और न ही अवैध खनन व परिवहन पर रोक लगाने के लिए कोई सख्त कदम उठाया गया। खनिज अधिकारी दीपक तिवारी की यह निष्क्रियता अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण और मिलीभगत के संदेह को जन्म दे रही है।
सवालों से बचते दिखे जिम्मेदार अधिकारी
जब इस पूरे मामले में मीडिया और शिकायतकर्ताओं ने खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी दीपक तिवारी से उनका पक्ष जानना चाहा, तो वे पहले कार्यालय में अनुपस्थित बताए गए। बाद में उपस्थिति मिलने पर भी घंटों तक इंतजार कराया गया। इस दौरान वे ठेकेदारों के साथ चाय-नाश्ता और लंबी बातचीत में व्यस्त नजर आए, लेकिन अवैध खनन और रॉयल्टी हेराफेरी से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देने से बचते रहे। उनका यह रवैया संदेह को और गहरा करता है।
कलेक्टर और मुख्यमंत्री के अधीन विभाग, फिर भी कार्रवाई नदारद…?
गौरतलब है कि खनिज विभाग जिले में सीधे कलेक्टर के अधीन कार्य करता है और प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री के अधीन आता है। इसके बावजूद एक खनिज अधिकारी की लापरवाही और निष्क्रियता खुलेआम नजर आ रही है। यदि इक्का-दुक्का गाड़ियों का अवैध परिवहन होता तो बात समझ में आती, लेकिन नदी के मुहाने पर हजारों गाड़ियों का आवागमन, खुलेआम रॉयल्टी हेराफेरी के आरोप, और आसपास के खेतों का बर्बाद होना—यह सब गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या जिला प्रशासन और शासन इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करेगा?
या फिर अवैध खनन का यह खेल यूँ ही किसानों की जमीन और सरकारी खजाने को खोखला करता रहेगा…?



