कबीरधाम जिलाछत्तीसगढ़

अभिताभ नामदेव के खिलाफ रची गई साजिश बेनकाब, राजधानी की प्रेसवार्ता में सच आया सामने

कवर्धा/रायपुर।
कवर्धा के वरिष्ठ पत्रकार, सबका संदेश साप्ताहिक के संपादक एवं 15 वर्षों से निर्वाचित नामदेव समाज के जिलाध्यक्ष अभिताभ नामदेव की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने की कथित साजिश का बड़ा खुलासा राजधानी में आयोजित प्रेसवार्ता में हुआ। प्रेस के सामने दस्तावेज, तथ्य और पुलिस की कार्रवाई का ब्यौरा रखते हुए उन्होंने कहा— “सच को दबाने की हर कोशिश नाकाम रही है।”

06 फरवरी की घटना: सामान्य जांच, बनाया गया सनसनी
उन्होंने स्पष्ट किया कि 06 फरवरी को उनके निर्माणाधीन होटल/लॉज परिसर में पुलिस की नियमित जांच हुई थी। जांच के दौरान मिले युवक-युवती दोनों बालिग पाए गए। किसी प्रकार की अवैध गतिविधि, नाबालिग की संलिप्तता या आपत्तिजनक कृत्य नहीं मिला। होटल संचालन से जुड़े दस्तावेज जांच में सही पाए गए।
पुलिस अधिकारियों ने भी मीडिया को बताया कि कोई संदिग्ध तथ्य सामने नहीं आया।
इसके बावजूद, सोशल मीडिया और कुछ मंचों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर भ्रामक खबरें प्रसारित की गईं। अभिताभ नामदेव ने इसे “पूर्व नियोजित दुष्प्रचार” बताया।

सामाजिक प्रतिद्वंद्विता का एंगल
प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत और गवाह के तौर पर जिन नामों का उल्लेख सामने आया, वे सामाजिक चुनाव में उनके पूर्व प्रतिद्वंद्वियों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि लगातार 15 वर्षों से समाज के विश्वास से अध्यक्ष चुने जाने के कारण कुछ लोग हतोत्साहित हैं और व्यक्तिगत द्वेष में षड्यंत्र रच रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में कवर्धा में पहला नामदेव सामाजिक भवन बना, जिसका प्रारंभ में कुछ लोगों ने विरोध भी किया था, लेकिन आज वही भवन समाज के लिए गर्व का केंद्र है।
अब होगी कानूनी कार्रवाई
अभिताभ नामदेव ने दो टूक कहा कि झूठी शिकायत, भ्रामक समाचार और सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “मेरी चुप्पी को कमजोरी समझा गया, लेकिन अब हर झूठ का जवाब कानून देगा।”

समाज का खुला समर्थन
प्रेसवार्ता में उपस्थित समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों ने एक स्वर में उनका समर्थन किया। उनका कहना था कि यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने की कोशिश है।

अभिताभ नामदेव ने कहा कि वे 2010 से भारत सरकार में पंजीकृत संपादक हैं और समाज सेवा व पत्रकारिता में उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शी रहा है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें, बल्कि सत्यापित तथ्यों को देखें।
“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”

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