
ट्रैप कैमरों में कैद हुए बाघ-बाघिन व शावक, अप्रैल-मई से शुरू हो सकती है जंगल सफारी
कवर्धा।
कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य से वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से उत्साहजनक खबर सामने आई है। वर्षों बाद एक बार फिर यहां बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघ, बाघिन और उनके शावकों की तस्वीरें कैद हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि भोरमदेव का जंगल अब बाघों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बनता जा रहा है।
वन मंडल अधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में चार से अधिक बाघ और बाघिन सक्रिय हैं। इनकी गतिविधियां प्रभूझोल, चिल्फी, बेंदा, झलमला सहित भोरमदेव अभ्यारण्य के आंतरिक हिस्सों में दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ बाघ नए और शांत इलाकों की ओर विचरण कर रहे हैं। खास बात यह है कि बाघिनें शावकों के साथ लंबे समय से यहां मौजूद हैं, जो क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है।
निगरानी बढ़ी, लोकेशन गोपनीय
बाघों की मौजूदगी के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। प्रभूझोल से जामुनपानी मार्ग तक बाघों के पगमार्क मिले हैं। सुरक्षा और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बाघों की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की जा रही है, वहीं गश्त और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। शावकों के साथ बाघों का शिकार करना यह दर्शाता है कि जंगल में शिकार प्रजातियों की पर्याप्त उपलब्धता है।
इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
बाघों की वापसी को देखते हुए वन विभाग भोरमदेव में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अप्रैल या मई से सफारी आम पर्यटकों के लिए खोली जा सकती है। सफारी संचालन का जिम्मा गुजरात की एक अनुभवी एजेंसी को सौंपा गया है। टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन होगी। इससे क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
भोरमदेव अभ्यारण्य में बाघों की स्थायी वापसी छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है और यह साबित करती है कि सतत संरक्षण प्रयासों से जंगलों की जैव विविधता फिर से समृद्ध हो सकती है



