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महापौर की चुप्पी और स्वास्थ्य प्रभारी की नाकामी से शहर बना कचरे का अड्डा, स्वच्छता के चुनावी वादे हवा हवाई…

दुर्ग// नगर निगम दुर्ग कभी “साफ-सुथरे” का सपना दिखाकर जनता से वोट मांगा गया था, लेकिन आज हकीकत यह है कि नगर निगम दुर्ग की पहचान कचरे के ढेर और बदबूदार वातावरण से हो चुकी है। जनता पूछ रही है—क्या यही है सुशासन…?

बीते 20–25 सालों की तुलना में वर्तमान में हालात सबसे बदतर नजर आ रहे हैं। धंधा नाका के पास FCI गोदाम से लेकर पं.रविशंकर सुपर स्टेडियम तक, हर प्रमुख मार्ग और रहवासी क्षेत्र गंदगी से पटा हुआ है। इंदिरा मार्केट में तो हालात इतने बिगड़े हैं कि व्यापारियों और ग्राहकों को बदबूदार माहौल में कामकाज करना पड़ रहा है।

महापौर अलका बाघमार और स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल पर जनता का भरोसा अब टूटता नजर आ रहा है। कारण साफ है…

➡️ महापौर स्वच्छता के नाम पर सिर्फ पोस्टरबाजी और घोषणाओं तक सीमित हैं।

➡️ स्वास्थ्य प्रभारी न केवल निष्क्रिय हैं, बल्कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग रहे हैं। इतना ही नहीं, महापौर के लिखित निर्देश तक को नज़र अंदाज़ किया जा रहा है।

चुनाव के समय किए गए वादे आज ठहाका बन चुके हैं। निगम प्रशासन ने स्वच्छ शहर का जो सपना दिखाया था, वह अब गंदगी और बीमारियों के बीच दम तोड़ चुका है।

शहरवासियों का कहना है कि जब सफाई जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल पा रही, तो बाकी वादों पर भरोसा कैसे किया जाए…? जगह-जगह पसरे कचरे और बदबूदार माहौल ने बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सेहत को खतरे में डाल दिया है।

जनता का कटाक्ष!

शहर में आज चर्चा यही है..

“दुर्ग में कचरे का पहाड़ खड़ा है, लेकिन निगम प्रशासन अब भी नींद में पड़ा है।”

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