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लोकतंत्र पर हमला: नक्सलियों ने उप सरपंच को उतारा मौत के घाट

दहशत का तांडव: उप सरपंच की गला घोंटकर हत्या, नक्सलियों ने ली जिम्मेदारी

सुकमा में नक्सलियों की बौखलाहट: उपसरपंच की गला घोंटकर हत्या, इलाके में फैली दहशत”

छत्तीसगढ़। सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में माओवादियों ने सोमवार को एक और कायराना वारदात को अंजाम दिया। बिना वर्दी के पहुंचे नक्सलियों ने तारलागुड़ा के उपसरपंच मुचाकी रामा को उनके घर से उठाया और जंगल में ले जाकर रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। यह घटना सोमवार दोपहर लगभग 3:00 बजे की है।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को बरामद किया। शव को वैधानिक कार्यवाही के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। साथ ही, पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, मुचाकी रामा एक सक्रिय और प्रभावी जनप्रतिनिधि थे। वे स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों में सहयोग कर रहे थे, जिसे नक्सलियों ने विरोधी समझा। नक्सलियों ने बिना किसी वर्दी के गांव में प्रवेश किया, रामा को उनके घर से उठाया और फिर जंगल में ले जाकर उन्हें हत्या का शिकार बना दिया।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ जांच के दौरान इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। मामले में शामिल नक्सलियों की पहचान के प्रयास जारी हैं और उन्हें जल्द पकड़ने की योजना बनाई जा रही है।

इलाके में दहशत का माहौल
यह हत्या पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर चुकी है। नक्सलियों के इस हमले ने स्थानीय लोगों को भयभीत कर दिया है। पुलिस और सुरक्षा बलों का कहना है कि वे नक्सलियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रहे हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं और इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय करेंगे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही इस जघन्य अपराध में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।

जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे जनप्रतिनिधियों को लगातार नक्सलियों से खतरा बना रहता है, जिससे उनके कामकाज पर भी असर पड़ता है।

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